बंगाली आंटी को खेत में चोदा

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna मैंने कामुकता डॉट कॉम की लगभग सारी कहानियों को पढ़ा है, मुझे इसकी सारी कहानी बहुत ही अच्छी लगी। उनको पढ़ने के बाद में आपके लिए एक ऐसी कहानी लेकर आया हूँ जिसे मैंने अपनी आँखों के सामने होते हुए देखा था। अब इससे पहले कि में अपनी कहानी को शुरू करूँ सबसे पहले में उन दोनों लोगों का परिचय आपसे करा दूँ। इस कहानी में दो लोग कोई और नहीं एक मेरी आंटी और दूसरा एक आदमी जिसकी उम्र 35 साल की है। यह कहानी वैसे तो कुछ पुरानी है, लेकिन मेरे सामने जब भी वो दिन याद आता है तो मुझे ऐसा लगता है कि यह कल की ही बात है। मेरा नाम बबलू है और जैसा कि मैंने पहले बताया कि मेरे पड़ोस में बंगाली आंटी रहती है, जिनसे में काफ़ी घुलामिला हूँ। फिर एक बार में उनके साथ उनके गाँव गया, उनके घर पर पूजा थी जिसमें आंटी को जाना जरूरी था, लेकिन अंकल अपनी मीटिंग की वजह से नहीं जा पा रहे थे इसलिए उन्होंने मुझे आंटी के साथ भेज दिया और हम दोनों को जाने के लिए कहा। फिर आंटी ने कहा कि ठीक है। तो तब मैंने देखा कि आंटी बहुत खुश थी और पैकिंग करने लगी थी।

फिर हम लोग सुबह की ट्रेन से गाँव पहुँच गये तो वहाँ रामू नौकर हमें लेने के लिए आया हुआ था, तो आंटी उनको देखकर बहुत खुश हुई और रामू भी खुश हुआ। फिर रामू आंटी को देखता रहा और आंटी भी उनको देखते रही, तो मुझे दाल में कुछ काला दिखा। फिर हम लोग बेलगाड़ी में बैठे और फिर रामू ने मुझसे कहा कि तुम चलाओ, तो मैंने कहा कि ठीक है। फिर आंटी और रामू पीछे बैठ गये। फिर थोड़ी दूर चलते चलते मैंने आंटी की आवाज सुनी तो मैंने पीछे देखा, तो रामू और आंटी एक दूसरे के सामने थे। फिर तभी आंटी ने मुझसे कहा कि सामने देखकर चलो। फिर हमे लोग घर पहुँचे, तो तब आंटी बाथरूम में चली गई और फिर थोड़ी के देर बाद बाहर आई।

फिर रामू ने कहा कि चलो तुमको खेत में ले जाता हूँ। तो आंटी मुस्कुराते हुए बोली कि हाँ चलो, अब में भी उनके साथ था। फिर हम लोग खेत में पहुँचे तो मैंने देखा कि वहाँ बहुत लंबी घास हुई थी। तब मैंने रामू को आंटी की गांड पर अपना हाथ फैरता हुए देखा। तो तब आंटी ने कहा कि लड़का इधर है, वो देख लेगा। उनको पता नहीं था कि मैंने देख लिया था। फिर तब रामू ने मुझसे कहा कि बबलू तुम दूर जाकर खेलो, मुझे तुम्हारी आंटी से बातें करनी है। फिर मैंने आंटी के सामने देखा तो आंटी मुस्कुरा रही थी और मुझसे कहा कि तुम यहाँ से जाओ? तो में वहाँ से चलने लगा और फिर आंटी रामू भी घास के अंदर जाने लगे, तो मुझे दाल में कुछ काला नजर आया। फिर में भी उनके पीछे-पीछे गया तो मैंने देखा कि रामू आंटी दोनों एक पेड़ के पास गये और आंटी पेड़ से चिपककर खड़ी हो गई।

READ  बहन के साथ मिलकर माँ का दर्द मिटाया

अब रामू अपना एक हाथ आंटी के पेटीकोट में डालने लगा था और आंटी भी अपना पेटीकोट उठाकर उसका साथ देने लगी थी, लेकिन मुझे उनकी कोई भी बातें सुनाई नहीं दे रही थी इसलिए में नजदीक चला गया। फिर रामू ने आंटी की चूत को अपने दोनों हाथों से फैलाया। अब आंटी थोड़ा सा विरोध कर रही थी, लेकिन उनके विरोध में उनकी हामी साफ दिख रही थी। फिर इसके बाद रामू ने आंटी की चूत पर अपना काला लंड जो कि 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था, उसको सटाकर हल्का सा अपनी कमर को हिलाकर एक धक्का लगाया तो आंटी के मुँह से आह की आवाज निकल गई। अब में समझ गया था कि आंटी की चूत में रामू का लंड चला गया है। फिर रामू ने अपनी कमर को झटका देना शुरू किया। अब रामू जब-जब ज़ोर से झटका लगाता था, तो आंटी के मुँह से आअहह की आवाज सुनाई पड़ती थी।

फिर कुछ देर के बाद जब रामू ने आंटी की चूचीयों को मसलना शुरू किया, तो उनका जोश और बढ़ गया। अब एक तरफ रामू चूत में ज़ोर से झटके लगाने लगा था, तो दूसरी तरफ आंटी की चूचीयों को मसलने लगा था। फिर आंटी की चूत में रामू का लंड जब आधे से ज़्यादा अंदर चला गया, तो आंटी नहीं आह, हाईईईईईई, ससस्स की आवाजे निकालने लगी। फिर रामू ने आंटी के होंठो को चूसना शुरू कर दिया। फिर लगभग आधे घंटे तक चोदने के बाद रामू का बीज आंटी की चूत में गिरा। अब आंटी भी बहुत ही खुश थी। फिर कुछ देर के बाद रामू ने अपना लंड बाहर निकाल लिया। फिर आंटी 5 मिनट तक लेटी रही। अब वो उठकर जाना चाहती थी, लेकिन रामू ने उनको रोक लिया और आंटी से कहा कि कहाँ जा रही हो? तो तब आंटी ने कहा कि आज के लिए इतना काफी है। फिर तब रामू ने कहा कि अभी तो और चुदाई बाकी है, तुम रुक जाओ। फिर तब रामू ने आंटी के पीछे जाकर आंटी की गांड पर अपना लंड रखा और उनकी कमर को पकड़कर एक जोरदार झटका मारा तो आंटी के मुँह से आआहह की आवाज निकलते ही में समझ गया कि आंटी की गांड में रामू का लंड चला गया है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

READ  दोस्त के बाप के साथ उसकी माँ को चोदा

फिर रामू ने अपनी कमर को हिलाना शुरू किया और कुछ ही देर में उसके पूरे लंड को आंटी की गांड में घुसा दिया। फिर रामू आंटी की गांड को लगभग 10 मिनट तक मारने के बाद जब धीरे-धीरे शांत पड़ गया तो में समझ गया कि आंटी की गांड में रामू का बीज गिर गया है। फिर रामू ने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और आंटी के दोनों पैरो को थोड़ा सा फैला दिया, क्योकि आंटी ने अपने दोनों पैरो को पूरा सटा रखा था। फिर रामू ने आंटी की चूत को देखा और आंटी से पूछा कि पेशाब नहीं करोगी? तो आंटी ने अपनी गर्दन हिलाकर कहा कि नहीं। फिर रामू ने जैसे ही अपने लंड को आंटी की चूत के ऊपर सटाया तो आंटी ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत को फैला दिया। फिर रामू ने अपने लंड के अगले भाग को आंटी की चूत में डाल दिया और आंटी की चूचीयों को पकड़कर एक जोरदार झटके के साथ अपने लंड को अंदर घुसा दिया। अब आंटी के मुँह से आअहह, उफफफफ्फ, थोड़ा धीरे, इसस्स्स्स्सस्स, इसस्स्सस्स, आआहह कर रही थी, लेकिन रामू पर उनकी इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था।

अब वो हर 4-5 छोटे-छोटे झटको के बाद एक ज़ोर का झटका दे रहा था। फिर उसका लंड जब आधे से ज़्यादा अंदर चला गया, तो आंटी ने रामू से कहा कि अब और अंदर नहीं डालना, वरना मेरी चूत फट जाएगी। फिर तब रामू ने कहा कि अभी तो आधा बाहर है। फिर तब आंटी ने यह समझ लिया कि आज उनकी गोरी चूत फटने वाली है। अब आंटी की हर कोशिश को नाकाम करते हुए रामू आंटी की चूत में अपने लंड को अंदर ले जाया रहा था। फिर आंटी ने जब देखा कि अब बर्दाश्त से बाहर हो रहा है तो उन्होंने रामू से कहा कि में आपसे बहुत छोटी हूँ, आआहह नहीं, हाईईईईई, उईईईईई, आहह। अब रामू ने लगातार कई जोरदार झटके मारकर अपने पूरे लंड को आंटी की चूत में घुसा दिया था और साथ में आंटी की चूचीयों को खूब मसला था। अब आंटी को भी मज़ा आने लगा था। फिर रामू ने एक तरफ से अपनी कमर से ज़ोर से एक झटका मारा और दूसरी तरफ से उन्होंने आंटी की ब्रा को फाड़ दिया। अब में आंटी के मुँह से ज़ोर की चीख के साथ आंटी के पैर को पटकते हुए देखकर समझ गया था कि रामू ने ना सिर्फ़ आंटी की ब्रा को फाड़ा है बल्कि उसने आंटी की चूत को भी फाड़ दिया था, शायद आंटी को इसी का इंतजार था।

READ  वो मस्त मंदाकिनी थी

फिर रामू ने अपने लंड को आंटी के चूत में पूरी तरह से सटा दिया और इस तरह से उसने पूरे 25 मिनट तक आंटी की चुदाई की। फिर इसके बाद आंटी और रामू शांत पड़ गये। तो तब में समझ गया की आंटी की चूत में रामू का बीज गिर गया है। अब वो दोनों पूरी तरह से थक चुके थे। फिर रामू ने अपने लंड को बाहर निकाल दिया और आंटी के बगल में लेट गया। फिर मैंने गौर से देखा तो ऐसा लगा कि आंटी की चूत को किसी ने मोटे मूसल लंड से खूब रौदा है जिससे उनकी चूत फूल गई थी। फिर उन दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहने और वहाँ से चलने लगे। फिर तब में भी वहाँ से हट गया, ताकि उनको पता ना चले कि मैंने सब कुछ देखा है। फिर हम तीनों घर वापस आ गये और रामू आंटी को देखकर मुस्कुराने लगा कि बबलू को कुछ नहीं पता चला, लेकिन मैंने भी उनको ऐसा ही दिखाया कि मुझे कुछ नहीं पता है ।।

धन्यवाद …

Antarvasna Hindi Sex Stories © 2016