माँ की चूत का बलिदान

हैल्लो दोस्तों, Antarvasana आज में आपके लिए मेरी माँ की चुदाई की कहानी लेकर आई हूँ। ये एक लंबी कहानी है, लेकिन छोटे रूप में आपके सामने पेश कर रही हूँ। यह उस समय की बात है जब मेरी शादी होने वाली थी तो तब ससुराल वालों ने 50,000 रुपए दहेज में माँगे थे, जिसे मेरे घर वाले देने में असमर्थ थे। फिर एक दिन मेरे होने वाले ससुर कुछ काम से हमारे घर आए और रात को हमारे घर रुके थे। फिर रात को खाने के बाद उनका बिस्तर लगा दिया और वो लेट गये और मेरा बाप खेत में चला गया था। तभी मेरे ससुर ने कहा कि मेरा बदन बहुत दर्द कर रहा है। तो तब मेरी माँ तेल लेकर आई और मेरे ससुर से कहा कि अपने कपड़े उतार दीजिए, में मालिश कर देती हूँ। तो मेरे ससुर ने अपने कपड़े उतार दिए और माँ पलंग के कोने पर बैठकर उनकी मालिश करने लगी।

अब उस वक्त मेरी माँ ने ब्लाउज, पेटीकोट और साड़ी पहनी हुई थी, उनका ब्लाउज पारदर्शी था और उस वक्त माँ ने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए उनके निप्पल साफ दिख रहे थे। फिर माँ मेरे ससुर की पीठ पर और छाती पर मालिश करने के बाद उनके पैरो पर तेल लगाने लगी। अब वो दोनों बातें कर रहे थे, तो तभी माँ की साड़ी का पल्लू सरक गया। अब उनके हाथ पर तेल लगे होने की वजह से उन्होंने पल्लू ऊपर तो किया, लेकिन वो बार-बार सरककर नीचे गिर रहा था। अब माँ की 38 साईज की चूचीयाँ देखकर और माँ के कोमल हाथों के स्पर्श की वजह से मेरे ससुर के अंडर का मर्द जाग चुका था। अब उनका लंड धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था।

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फिर तभी माँ ने उनसे कहा कि समधी जी दहेज की रकम बहुत ज़्यादा है, कुछ कम नहीं हो सकती क्या? तो तब ससुर ने कहा कि कम तो हो सकती है, लेकिन और वो अटक गये, अब वो माँ की चूचीयों को घूर रहे थे। तब माँ ने उनसे पूछा कि लेकिन क्या? तो उन्होंने बैठकर माँ के दोनों हाथों को पकड़कर पलंग पर डाल दिया और माँ के ऊपर चढ़कर कहा कि तुम्हें मेरे साथ सोना पड़ेगा। अब माँ उनकी इस हरकत से घबरा गयी थी और अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी थी, लेकिन छुड़ा नहीं पाई और मेरे ससुर को कहने लगी कि वो उन्हें छोड़ दे, लेकिन मेरे ससुर ने माँ को और कसकर पकड़ लिया और कहा कि देखो वैसे भी तेरा पति खेत गया है और तुम्हारी बेटी सो रही है, मान जाओ और मेरी रात को रंगीन बना दो, में दहेज में सिर्फ़ 20000 रुपए लूँगा।

फिर भी माँ नहीं मानी और अपने आपको छुड़ाने की नाकाम कोशिश करती रही। तभी मेरे ससुर ने उनकी बाई चूची को अपने एक हाथ में ले लिया और कहा कि देखो मान जाओ, नहीं तो में तुम्हारी बेटी की जिंदगी हराम कर दूँगा और उसे कहीं भी रिश्ता नहीं मिलेगा। तब माँ थोड़ी शांत हुई और मेरे ससुर से कहने लगी कि अगर इसके बारे में किसी को पता चल गया तो मेरा क्या होगा? तो तब मेरे ससुर ने कहा कि वैसे भी यहाँ तुम्हारी बेटी के अलावा और कोई तो है नहीं और तुम्हारी बेटी सो रही है तो किसी को पता चलने का सवाल ही नहीं है और फिर मेरे ससुर ने साड़ी के पल्लू को माँ की चूचीयों पर से हटा दिया और ब्लाउज खोलकर माँ की चूचीयाँ दबाने लगे थे। अब माँ चुपचाप पड़ी हुई अपनी इज़्जत मेरे ससुर को सोंप रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर मेरा ससुर माँ की एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और वैसे भी मेरे ससुर ने सिर्फ़ छोटी सी धोती पहनी थी। अब माँ की बड़ी-बड़ी चूचीयाँ तनकर और बड़ी हो गयी थी। अब माँ भी उनकी हरकतों का मज़ा लेने लगी थी और उनके सिर को अपनी चूचीयों पर दबाने लगी थी। फिर थोड़ी देर के बाद मेरे ससुर ने माँ को अपने लंड के ऊपर बैठा दिया और माँ की दोनों चूचीयों को दबाने लगे थे और फिर थोड़ी देर तक माँ की चूचीयों से खेलने और चूसने के बाद माँ की ब्लाउज उतार दी। अब माँ ऊपर से पूरी नंगी थी। फिर मेरे ससुर ने माँ के पैरो पर अपना एक हाथ रखा और उनकी जाँघो को सहलाने लगे थे। अब माँ बहुत गर्म हो गयी थी और अब वो मेरे ससुर की छाती को चूमने लगी थी।

फिर मेरे ससुर ने माँ को अपने बगल में लेटा दिया और उनका पैर अपने पैरो पर खींच लिया और उनके पेटीकोट के अंदर अपना एक हाथ डालकर माँ के पैरो को सहलाने लगे थे। अब उनके ऊपर नीचे होने की वजह से साड़ी तो पहले ही खींचकर माँ से अलग हो गयी थी और उनका पेटीकोट भी कमर के पास इक्कठा हो गया था। अब मेरा ससुर और दबा-दबाकर माँ के पैरो को सहला रहा था और माँ पूरी तरह से गर्म हो गयी थी और खुद ही अपनी दोनों चूचीयों को अपने हाथों से दबाने लगी थी। फिर मेरे ससुर ने माँ की पेंटी को खींचकर उतार दिया और माँ को सीधा लेटाकर उनकी चूत में उंगलियाँ डालने लगे थे। अब माँ पूरी तरह से गर्म हो गयी थी और अपने मुँह से सिसकारियाँ भरने लगी थी और फिर जैसे ही मेरा ससुर उनकी चूत में अपनी उंगली घुसाता, तो वो अपनी चूत को ऊपर उठा-कर उन्हें अंदर ले लेती। फिर मेरे ससुर ने माँ के पेटीकोट को खोलकर उतार दिया और माँ को पूरा नंगा कर दिया और अपनी धोती खोलकर वो भी नंगे हो गये थे। अब उनका 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा लंड पूरा तनकर माँ को चोदने को उतावला हो रहा था। तभी मेरा ससुर माँ की चूत के पास झुका और उनकी चूत को चौड़ी करके चाटने लगा। तो तभी माँ ने उन्हें रोकते हुए कहा कि ये आप क्या कर रहे है? तो तब मेरे ससुर ने माँ को धकेलते हुए कहा कि चुपचाप बिस्तर पर लेट जा और मुझे तेरे हुस्न का मज़ा लेने दे और फिर वो फिर से चूत चाटने लगे। तो थोड़ी देर में माँ ने अपना पानी छोड़ दिया।

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फिर मेरे ससुर ने अपना लम्बा लंड माँ की चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर उतार दिया। तो माँ भी इस अचानक हुए हमले को सहन नहीं कर पाई और उठकर ससुर से लिपट गयी और फिर मेरे ससुर ने माँ को चोदना शुरू कर दिया। फिर माँ चुपचाप उनसे चुदवाती रही। फिर मेरे ससुर ने माँ को आधे घंटे तक चोदा और फिर माँ के ऊपर लेट गये। फिर उस दिन उन्होंने माँ को तीन बार चोदा और आज भी मौका मिलने पर मेरी माँ मतलब उनकी समधन को खूब चोदते है ।।

धन्यवाद …

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