गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 10

लाला ने उसकी छाती पर antarvasna पड़ी क्रीम को जब kamukta अपनी 4 उंगलियो से समेटा तो उसके गुदाज मुम्मो को बुरी तरह से रगड़ता चला गया… ऐसा लग रहा था जैसे लाला ने उसके मुम्मो के साथ क्रीम वाली होली खेल ली है..

उसका उपरी छाती वाला हिस्सा चिकना हो गया…
लाला ने अपनी बेशर्मी दिखाते हुए वो सॉफ की हुई क्रीम अपने मुँह में लेकर चाट ली..

पिंकी तो सुलग कर रह गयी…
आज पहली बार उसके मुम्मो को किसी ने छुआ था…
और वो भी लाला ने..

पिंकी जानती थी की वो अगर चाहे तो गाँव के जवान और हॅंडसम लड़को को पटा कर ये सब मज़े ले सकती है
पर उस लाला में ना जाने क्या सम्मोहन था की वो उसके हाथो ऐसा काम करवाने चली आई थी…
और आज पहली बार उसका कमोत्तेजना से भरा स्पर्श पाकर और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गयी थी…

लाला की भी हालत खराब हो गयी थी…
उन्हे पैसे देकर तो अब लाला में भी हिम्मत सी आ गयी थी, इसलिए उसने ऐसा दुस्साहसी कदम उठाया था…
और जब ऐसा करने के बाद भी पिंकी ने कुछ नही कहा और अपना क्रीमरोल लेकर चुपचाप खाने लगी तो लाला समझ गया की चिड़िया ने दाना चुग लिया है…
यानी आगे भी वो उसके साथ ऐसी छेड़खानी कर सकता है, वो कुछ नही कहेगी..

उसके बाद लाला को धन्यवाद बोलकर दोनो बाहर निकल आई…

घर आकर दोनो बहुत खुश थी, उनकी प्लानिंग का पहला चरण पूरा हो चुका था. लाला की भी हालत खराब हो गयी थी… उन्हे पैसे देकर तो अब लाला मे भी हिम्मत सी आ गयी थी, इसलिए उसने ऐसा दुस्साहसी कदम उठाया था…और जब ऐसा करने के बाद भी पिंकी ने कुछ नही कहा और अपना क्रीम रोल लेकर चुप छाप खाने लगी तो लाला समझ गया की चिड़िया ने दाना चग लिया है…यानी आगे भी वो उसके साथ ऐसी छेड़खानी कर सकता है, वो कुछ नही खेगी..

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उसके बाद लाला को धन्यवाद बोलकर दोनो बाहर निकल आई…

घर आकर दोनो बहुत खुश थी, उनकी प्लानिंग का पहला चरण पूरा हो चुका था.

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अब आगे
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घर आने के बाद दोनो ने अपना दिमाग़ लगाया की अब इन पैसों को कैसे अपने माँ बाप के थ्रू लालाजी तक पहुँचाया जाए..

और आख़िरकार पूरी रात सोचने के बाद पिंकी के दिमाग़ में एक आइडिया आ ही गया.

अगले दिन जब पिंकी और निशि स्कूल में मिले तो उसने सोनी को वो आइडिया बताया और उसने भी अपनी सहमति जता दी.

स्कूल से वापिस आकर पिंकी ने खुश होते हुए अपनी माँ को बताया की उसे स्कूल की तरफ से 10 हज़ार रूपए की स्कॉलरशिप मिली है…
पढ़ने में तो वो होशियार थी ही, इसलिए उसकी माँ को कोई शक भी नही हुआ…
कुछ ही देर में निशि भी आ गयी और खुश होकर उसने भी वही बात दोहराई ….
पिंकी की माँ की आँखो में आँसू आ गये…
10 हज़ार उनके लिए बहुत बड़ी रकम थी…
उसकी माँ के दिमाग़ में सिर्फ़ वही ख्याल आया की उन पैसो से वो लाला का क़र्ज़ उतार सकते है..

रात को जब पिंकी के पापा घर आए तो इस खबर को सुनकर वो भी काफ़ी खुश हुए..
पिंकी ने बताया की अगले दिन कलेक्टर साहब खुद आकर वो इनाम उसे स्कूल में देंगे..

उसके माँ -बाप ग़रीब होने के साथ-2 अनपढ़ भी थे, इसलिए उन्हे इन बातो का कोई ज्ञान ही नही था … और वो पिंकी के स्कूल जाने से भी कतराते थे… इसलिए पिंकी के झूट के पकड़े जाने का सवाल ही नही उठता था..

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अगले दिन स्कूल से आकर पिंकी ने 10 हज़ार रुपय अपनी माँ के हाथ में रख दिए..
जिसे उसके पिताजी ने लालाजी को वापिस कर दिया…
पैसे वापिस करने से पहले पिंकी ने उन्हे समझा दिया की वो ये किसी से भी ना कहे की ये पैसे पिंकी के स्कूल से मिले है, वरना सब मज़ाक उड़ाएंगे की बेटी को मिले पैसो से अपना क़र्ज़ उतार रहे है…
इसलिए पैसे वापिस करते हुए पिंकी के पिताजी ने लाला को यही कहा की अपने ससुराल वालो से ये पैसे उधार लिए है,ताकि वो अपना कर्ज़ा उतार सके..

और इस तरह से लालजी के पैसे वापिस उन्ही के पास पहुँच गये..
और बाकी के बचे 2 हज़ार रुपय उन दोनो ने बाँट लिए…

सब कुछ वैसे ही हो रहा था जैसा उन्होने सोचा था.

अगले दिन जब पिंकी लालाजी की दुकान पर गयी तो लालाजी ने पूरी रात सोचकर उसके लिए कुछ अलग ही प्लान बना रखा था.

पिंकी को देखकर लालाजी ने कहा : “अरी पिंकी..अच्छा हुआ तू आ गयी…तुझसे बहुत ज़रूरी काम था मुझे…”

पिंकी : “हाँ लालाजी , बोलिए…क्या काम है..”

अंदर से तो वो भी जानती थी की लालाजी के दिमाग़ मे ज़रूर कुछ गंदा चल रहा है…
वैसे चल तो उसके दिमाग़ में भी रहा था..

लाला : “देख ना..कल रात से तबीयत ठीक नही है…पूरी पीठ दुख रही है…वैध जी से दवाई भी ली..उन्होने ये तेल दिया है…बोले पीठ पर लगा लेना, आराम मिलेगा…अब अपनी पीठ तक मेरा हाथ तो जाएगा नही….इसलिए तुझे ही मेरी मदद करनी पड़ेगी…”

लालाजी तो ऐसे हक़ जता कर बोल रहे थे जैसे पूरे गाँव में कोई और है ही नही जो उनकी मदद कर सके..
और उनके कहने का तरीका ठीक वैसा ही था जैसे पिंकी ने उनसे पैसो की मदद माँगी थी…
इसलिए वो भी समझ गयी की उसे भी लालाजी की मदद करनी ही पड़ेगी…

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पिंकी ने सिर हिला कर हामी भर दी..

लालजी ने तुरंत शटर आधा गिरा दिया और पिंकी को लेकर दुकान के पिछले हिस्से में बने अपने घर में आ गए…

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