गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 9

अचानक लालाजी ने नोट antarvasna किया की जो कुर्ती kamukta पिंकी ने पहनी हुई है, उसका गाला काफी गहरा है और उसकी वजह से उसकी गोलाइयाँ सॉफ दिख रही है लालाजी की तो हालत पतली हो गयी….

कल वो अपनी नंगी गांड दिखा कर गयी थी और आज अपने नंगे आम दिखाने पर उतारू है…..

पिंकी ने डरा हुआ सा फेस बना रखा था…
वो धीरे से बोली : “लालाजी ..वो…वो ..आपसे कुछ ख़ास बात करनी थी…”

लालाजी ने आस पास देखा, दूर -2 तक कोई नही दिखाई दे रहा था…
लालाजी अपनी जगह से उठ कर बाहर निकले और अंदर पड़ी चारपाई पर जाकर बैठ गये…
उन्होने दोनो को भी वही बुला लिया..
दरवाजे पर परदा कर दिया ताकि बाहर से कोई उन्हे देख ना सके..

लालाजी की प्यासी नज़रों के सामने पिंकी के कबूतर फड़फड़ा रहे थे…
उसकी आधे से ज्यादा गोलाइयाँ उनकी आँखों के सामने थी …

लालाजी ने फ्रिज में से 2 केम्पा निकाल कर उन्हे पकड़ा दी….
ठंडी-2 बोतल हाथ में आते ही दोनो ने उसे मुँह से लगा कर पीना शुरू कर दिया…
बॉटल से 2 बूँद टपक कर उसकी क्लिवेज पर जाकर गिरी और गहरी घाटियों में गायब हो गयी…

लालाजी ने बड़ी मुश्किल से अपने सूखे गले को तर किया…

मन तो कर रहा था की उसकी गोलाईयों पर जीभ फिरा कर वो 2 बूँद भी वेस्ट होने से बचा ले…
पर ऐसा करना मुमकिन नही था..

लालाजी : “हाँ …अब बोल….क्या बात है….किसी चीज़ की ज़रूरत है क्या तुझे…?”

केम्पा पीने के बाद पिंकी बोली : “हाँ लालाजी … और आपके सिवा हमारी मदद कोई और नही कर सकता…”

लालाजी ने अपने कान उसकी तरफ लगा दिए और बोले : “हाँ हाँ बोल, क्या मदद चाहिए तुझे…”

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पिंकी : “लालाजी …वो …वो, हमें….. कुछ पैसो की ज़रूरत थी…”

लालाजी ने उन दोनो को ऐसे देखा जैसे विश्वास ही ना कर पा रहे हो…
भला उन्हे पैसो की क्या ज़रूरत आन पड़ी…

पर वो कुछ नही बोले…..
उनके दिमाग़ में तो कुछ और ही चलना शुरू हो गया था..

पिंकी : “हमे दरअसल….12 हज़ार रूपए की सख़्त ज़रुरत है”

लालाजी : “देख पिंकी…मुझे वैसे पूछना तो नही चाहिए…पर…इतने पैसे तुझे किस काम के लिए चाहिए…और ये पैसे तू वापिस कैसे करेगी…”

पिंकी जानती थी की लालाजी ये सब ज़रूर पूछेंगे…
इसलिए वो पहले से ही जवाब तैयार करके लाई थी…

वो बोली : “वो मैं अभी आपको नही बता सकती…पर मेरा विश्वास करिए…मैं आपके सारे पैसे जल्द ही लौटा दूँगी…” लालाजी तो अंदर से बहुत खुश हो रहे थे…
उनके हिसाब से तो ये उनके पास अपने आप फँसने चली आई थी…
12 हज़ार उनके लिए बहुत छोटी रकम थी…
और लालाजी अच्छे से जानते थे की उनके चुंगल में एक बार जब कोई फँस जाता है तो पूरी उम्र ब्याज देता रहता है..
असल वही खड़ा रहता है…
और इन दोनो हिरनियों को काबू में करने के लिए इससे अच्छा उपाय कुछ और हो ही नही सकता था..

लालाजी ये तो समझ गये थे की जैसा मुँह बनाकर वो उनके सामने बैठी है, पैसो की ज़रूरत कुछ ज़्यादा ही है…
इसलिए उन्होने एक बार फिर से पूछा : “पहले तू मुझे बता दे की पैसे किसलिए चाहिए तो मुझे देने में कोई परेशानी नही है..”

पिंकी ने तो सोचा था की लाला उनकी बात को जल्द ही मान जाएगा, पर वो भी बनिया आदमी था, इतनी आसानी से पैसे निकालने वाला नही था..

पिंकी ने कोई बहाना भी नही बनाया था, इसलिए उसके दिमाग़ ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया…
उसने सोनी की तरफ देखा, उसके चेहरे पर भी हवाइयां उड़ रही थी, यानी उसका दिमाग़ भी नही चल रहा था..

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पिंकी ने जल्द ही एक बहाना तैयार कर लिया, और बोली : “देखिए लालाजी , आपको मैं बता तो रही हूँ , पर आपसे निवेदन है की आप किसी से भी इस बारे में कुछ नही बोलना..ख़ासकर हमारे घर वालो से…”

पिंकी का इतना कहना था की ठरकी लाला ने आगे बढ़कर उसके हाथ पर अपने हाथ रख दिया और उसके नर्म हाथों को अपने खुरदुरे हाथों से मसलता हुआ बोला : “अर्रे, नही रे…तू मुझपर पूरा बिस्वास कर सकत है….बतला अब…”

पास आने की वजह से लाला उसकी मुम्मो की घाटी को थोड़ी और गहराई से नाप पा रहा था..

पिंकी की मुनिया तो एकदम से पनिया गयी….
एक तो लाला के सख़्त हाथ और उपर से उनकी गंदी नज़रे…
ऐसा लग रहा था जैसे उनकी आँखो से कोई शक्ति निकल कर उसके सख़्त मुम्मे मसल रही है…

पिंकी : “वो क्या है ना…इस साल हमारी 12वी क्लास ख़तम हो जवेगी…उसके बाद हमें कॉलेज करना है, और हमारे दोनो के घर वाले ये नही चाहते, वो बोल रहे है की इतना खर्चा करना उनके बस की बात नही है…इसलिए हमने सोचा की अभी के लिए आपसे पैसे लेकर अपने-2 फॉर्म भर लेंगे..और साथ में अपने अडोस पड़ोस के बच्चो को टूशन पढ़ा कर पैसे बनाते रहेंगे..ऐसा करने से घर वालो पर भी बोझ नही पड़ेगा और आपके पैसे भी धीरे-2 उतर जाएँगे..”

लालाजी मुस्कुराए और बोले : “वह , इरादा तो बहुत अच्छा है तुम दोनो का…और सच कहूं तो ऐसे काम के लिए मैं पैसे देने से कभी मना नही करता…पर कारोबारी आदमी हूँ , इसलिए सूद पर ही दूँगा…और हर महीने तुम दोनो को 600-600 रुपय मुझे सूद के देने होंगे..”

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पिंकी ने हिसाब लगाया तो वो काफ़ी ऊँची ब्याज दर थी…
पर उनके दिमाग़ में जो प्लान था उसके सामने ये 10% का ब्याज उनके आड़े आने वाला नही था…
इसलिए दोनो ने तुरंत हां कर दी…

लालाजी ने एक पेपर पर उन दोनो का राज़ीनामा लिया
उनके दस्तख़त करवाकर लाला ने उन दोनो के हाथ में 6-6 हज़ार रूपर रख दिए…

पैसे देखकर दोनो के चेहरे चमक उठे…
और लालाजी को धन्यवाद बोलकर वो दोनो उठ खड़ी हुई…
और जैसे ही वो दोनो जाने लगी तो लाला ने कहा : “अर्रे, इतनी जल्दी भी क्या है…थोड़ी देर रुक जा…अपने क्रीम रोल तो लेते जाओ दोनो…”

इतना कहकर लाला अपनी खीँसे निपोरता हुआ बाहर निकल आया और मर्तबान से 2 लंबे से क्रीमरोल्ल निकाल लिए…
अभी कुछ देर पहले ही फ्रेश बनकर आए थे इसलिए उनकी क्रीम भी ताज़ा थी…
लाला के दिमाग़ में कुछ चालाकी आई और उसने एक रोल में से उपर की क्रीम निकाल कर दूसरे पर लगा दी…
और अंदर आकर वो ज़्यादा क्रीम वाला रोल उसने पिंकी की तरफ लहरा दिया..
और जैसा लाला चाहता था, वैसा ही हुआ
उपर रखी क्रीम उछलकर नीचे गिरी और सीधा पिंकी के सीने पर आकर चिपक गयी…

लाला का हाथ तुरंत हरकत में आ गया और उसने वो क्रीम उसके सीने से पोंछ डाली..

ये सब इतनी जल्दी हुआ की पिंकी को भी समझने का मौका नही मिला की ये हुआ क्या है…
सोनी तो अपने रोल को पकड़ने के साथ ही उसे खाने में व्यस्त हो गयी…
पर पिंकी का पूरा शरीर काँप कर रह गया..

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