गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 2

निशि : “वैसे तेरी डेयरिंग antarvasna तो माननी पड़ेगी kamukta पिंकी, आज तूने जो कहा, वो करके दिखा दिया, बिना कच्छी के तेरे नंगे चूतड़ देखकर उस लाला का बुरा हाल हो रहा था…तूने देखा ना, कैसे वो फटी आँखो से तेरे और मेरे सीने को घूर रहा था…जैसे खा ही जाएगा हमारे चुच्चो को…”

पिंकी : “और तू भी तो कम नही है री..पहले तो कितने नाटक कर रही थी की बिना ब्रा के नही जाएगी, तेरे दाने काफ़ी बड़े है, दूर से दिखते है…पर बाद में तू सबसे ज़्यादा सीना निकाल कर वही दाने दिखा रही थी…साली एक नंबर की घस्ति बनेगी तू बड़ी होकर…”

इतना कहकर वो दोनो फिर से हँसने लगी…
लालाजी को तरसाकर उनसे चीज़े ऐंठने का ये सिलसिला काफ़ी दिनों से चल रहा था
और दिन ब दिन ये और भी रोचक और उत्तेजक होता जा रहा था..

दूसरी तरफ, लालाजी जब शबाना के घर पहुँचे तो वो अपनी बेटी को नाश्ता करवा रही थी…
लालाजी को इतनी सुबह आए देखकर वो भी हैरान रह गयी पर अंदर से काफ़ी खुश भी हुई…
आज लालजी बिना कहे ही आए थे, यानी उन्हे चुदाई की तलब बड़े ज़ोर से लगी थी..
उसके घर का राशन भी ख़त्म हो चुका था,
उन्हे खुश करके वो शाम को दुकान से समान भी ला सकती थी..

उसने लालाजी को बिठाया और अपनी बेटी को बाहर खेलने भेज दिया..

दरवाजा बंद करते ही लालाजी ने अपनी धोती उतार फेंकी..
अंदर वो कभी कुछ नही पहनते थे…

52 साल की उम्र के बावजूद उनका लंड किसी जवान आदमी के लंड समान अकड़ कर खड़ा था…

READ  मेरी बहन राधिका ने मुहं काला किया

शबाना : “या अल्ला, आज इसे क्या हो गया है…लगता है लालाजी ने आज फिर से कच्ची जवानी देख ली है…”

वो लालाजी की रग-2 जानती थी..

लालाजी के पास कुछ कहने-सुनने का समय नही था
उन्होने शबाना की कमीज़ उतारी और उसकी सलवार भी नोच कर फेंक दी..
बाकी कपड़े भी पलक झपकते ही उतर गये…

अब वो उनके सामने नंगी थी…

पर उसे नंगा देखकर भी उनके लंड में वो तनाव नही आ रहा था जो पिंकी की गांड की एक झलक देखकर आ गया था..

लालाजी उसके रसीले बदन को देखे जा रहे थे और शबाना ने अपनी चूत में उंगली घुसाकर अपना रस उन्हे दिखाया और बोली : “अब आ भी जाओ लालाजी , देखो ना, मेरी मुनिया आपको देखकर कितना पनिया रही है….जल्दी से अपना ये लौड़ा मेरे अंदर घुसा कर इसकी प्यास बुझा दो लाला….आओ ना…”

उस रसीली औरत ने अपनी रस में डूबी उंगली हिला कर जब लालाजी को अपनी तरफ बुलाया तो वो उसकी तरफ खींचते चले गये..
एक पल के लिए उनके जहन से पिंकी और निशि का चेहरा उतर गया..

वो अपना कड़क लंड मसलते हुए आगे लाए और शबाना की चूत पर रखकर उसपर झुकते चले गये…

लालाजी का वजन काफ़ी था
उनके भारी शरीर और मोटे लंड के नीचे दबकर उस बेचारी शबाना की चीख निकल गयी…

”आआआआआआआआआआआआअहह लालाजी ,……. मार डाला आपने तो…….. ऐसा लग रहा है जैसे कोई सांड चोद रहा है मुझे….. अहह……चूत फाड़ोगे क्या मेरी आज ….”

लालाजी भी चिल्लाए : “भेंन की लौड़ी …..तेरी चूत में ना जाने कितने लंड घुस चुके है, फिर भी तेरी चूत इतनी कसी हुई है…..साली…….कौनसा तेल लगती है इसपर…”

READ  मौसी के साथ पहले सेक्स का अनुभव

शबाना : “आआआआआअहह….आपकी ही दुकान का तेल है लालाजी ….आज सुबह ही ख़त्म हुआ है…शाम को फिर से लेने आउंगी ….”

उसने चुदाई करवाते-2 ही अपने काम की बात भी कर ली..

लालाजी भी जानते थे की वो कितनी हरामी टाइप की औरत है
पर चुदाई करवाते हुए वो जिस तरह खुल कर मस्ती करती थी
उसी बात के लिए लालाजी उसके कायल थे…

Antarvasna Hindi Sex Stories © 2016