चोर ने चोरी के साथ करी पूरी मेरी अधूरी 1

चूत चुदाई के Antarvasna साथ पैसा मिलने की उम्मीद से एक दिन जिस चोर ने मेरे जिस्म की प्यास चुदाई से बुझाई, उसकी चुदाई वाकई में काबिल-ए-तारीफ थी क्योंकि उसने मुझे ज़रूरत से ज़्यादा चोद दिया था। दोस्तों, आज मैं कामलीला डॉट कॉम में माध्यम से आपके लिए एक नई कहानी पेश करने जा रही हूँ यह एक ऐसी कहानी है जो बताती है कि, जब सेक्स दिमाग़ में चढ़ जाता है तो फिर कुछ भी नहीं सूझता है। यह कहानी लखनऊ की रहने वाली एक बहुत ही अच्छे घर की औरत की है और उसका नाम नीलोफर है। अब आप लखनऊ में नीलोफर को खोजने मत निकल पड़ना क्योंकि नीलोफर की पहचान छुपाने के लिए शहर का नाम बदल दिया गया और सभी घटनाएँ बिल्कुल सच्ची है।

हाय फ्रेंड्स, मैं नीलोफर, मेरी उम्र करीब 40 साल की है मैं लखनऊ के एक रईस घर की औरत हूँ मेरे पति के बहुत से कारोबार है, मेरा बेटा और पति मिलकर उनके कारोबार को सँभालते है मगर जितना बड़ा कारोबार होता है, उतनी ही दिक्कतें भी होती है। और इन्हीं दिक्कतों की वजह से मेरे पति को डाईबिटीज़ हो गई है और इसका सबसे ज़्यादा असर उनकी आँखों, और सेक्स-पावर पर हुआ, जो आदमी मुझे आधा पौन घंटे तक रगड़ता था वह आदमी अब इस हालत में था कि, मैं जो मर्ज़ी कर लूँ मगर उसके अंग में कोई कड़कपन नहीं आता था, और वह ज़िंदा या मुर्दा एक समान था। अब आप कहेंगे कि, एक औरत होकर मेरी भाषा ऐसे कैसी हो गई है?

तो सुनो, यह आज की बात नहीं है, करीब 2 साल पहले मैं अपनी एक किटी पार्टी में गई थी, वहाँ पर मेरी एक सहेली जो अपने पति की डाईबिटीज़ की समस्या की वजह से मेरी तरह ही सेक्स की आग में जल रही थी और फिर उसने ही मुझे बताया कि, अगर ज़्यादा आग लगे तो इंटरनेट पर कामलीला डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़कर मजा ले लिया कर और अपने हाथ से ही अपनी चूत की आग को शान्त कर लिया कर। और अब मैं तब से यही कर रही हूँ. जब घर पर कोई नहीं होता है तो मैं अपने लेपटॉप पर कोई अच्छी सी कहानी पढ़ लेती हूँ और कोई भी चीज़ जो मुझे ठीक-ठाक लगे उसको अपनी चूत के अन्दर डालकर अपनी आग बुझा लेती हूँ और इसका किसी को पता भी नहीं चलता है। दोस्तों इससे मेरी वासना भी शान्त हो गई और मुझको अपने घर से बाहर मुँह मारने की भी ज़रूरत नहीं पड़ी। और फिर जब मैंने मेरे पति को इसके बारे में बताया तो उन्होंने भी मेरी बात का बुरा नहीं माना, बल्कि मुझे एक प्लास्टिक का नकली लंड लाकर दे दिया था। अब तो हालत यह हो गई थी कि, मेरे पति देव मेरी चूत को चाटते थे और मैं उनका मरा हुआ लंड चूसती थी और फिर वह खुद ही उस नकली लंड को मेरी चूत में पेलते थे। और फिर जब हम दोनों ही शान्त हो जाते थे तो सो जाते थे। कभी-कभी तो मैं अकेली भी कर लेती थी और कभी-कभी जब मेरा दिल करता था तो मैं अपने पति के सामने भी कर लेती थी और वह भी हँस देते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि, मैं जो भी कर रही हूँ उनके सामने ही कर रही हूँ। बेशक मेरी सेक्स की ज़रूरत तो पूरी हो रही थी, मगर फिर भी दिल में एक बात आती थी कि, अगर कोई सच में ऐसा मर्द हो जिसका लंड सच में इस नकली लंड जितना तगड़ा हो तो उससे चुदकर कितना मज़ा आएगा। मगर इसके लिए मुझे घर से बाहर किसी और मर्द से चुदवाना पड़ता और वह मेरी बदनामी का कारण हो सकता था। चलो खैर…

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और फिर शाम को हम कभी-कभार क्लब भी चले जाते थे अब जब घर में बहुत पैसा हो तो पैसा अपने साथ बहुत सी बुरी आदतें भी लाता है। हमारे घर में सभी को शराब, सिगरेट की आदत थी सभी मर्दों को और औरतों को भी। घर की बहु भी पीती थी, और मैं तो सास थी, तो फिर मैं कैसे पीछे रह जाती पति को जुआ खेलने की भी लत थी सिर्फ़ यही नहीं और सब तरह की बुरी बातें भी हमारे घर में हो रही थी मुझे पता था की मेरे बेटे की घर से बाहर भी सेटिंग थी और मेरी बहु का भी घर से बाहर कोई यार था, मगर हाइ सोसाइटी में इन बातों को कोई भाव नहीं दिया जाता है। एकबार दीवाली की रात थी और हम सब क्लब में थे और सबने उस दिन खूब दारू पी रखी थी और फिर रात के करीब 2:30-3.00 बजे जब मुझे लगा कि, मुझे ज़्यादा हो गई है तो मैंने अपने पति से घर चलने को कहा, मगर उनके तो पत्ते फँसे हुए थे, तो वह मुझसे बोले कि, तुम जाओ घर मैं तो अभी और खेलूँगा. और फिर मैं क्या करती, बाहर आई और नशे में मैं लड़खड़ा रही थी और फिर मैं कार में बैठी और ड्राइवर मुझको घर तक ले आया। और फिर मैं कार से उतरकर घर के अन्दर जाने लगी तो लड़खड़ा कर गिर पड़ी थी तो फिर ड्राइवर भागकर आया और आकर उसने मुझे उठाया और कहा कि, अरे! मैडम, थोड़ा संभालकर! दोस्तों बेशक उसने मुझे सहारा देकर उठाया था, मगर उसके हाथों के छूने से मैं पहचान गई थी कि, साला मौके का फ़ायदा उठा रहा है, वरना नहीं तो संभालने में कोई किसी औरत की छाती पकड़ता है क्या? और फिर मैंने उसका हाथ आराम से अपनी छाती से हटा दिया था और फिर एक बार तो मैंने सोचा की, आज घर में कोई नहीं है अगर मैं इसे ही अपने बेडरूम में ले जाऊँ तो? और फिर मैंने सोचा कि, नहीं नहीं यह तो पता नहीं किस-किस को बताएगा कि, मैंने मैमसाब की चुदाई कर ली है। और फिर मैंने सोचा कि, छोड़ इसे और फिर मैं खुद को संभालती हुई अपने बेडरूम में आ गई और फिर मैंने अपने बेडरूम का ए.सी. चालू किया और फिर मैं बाथरूम में गई और फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर पहले तो मैं शावर के नीचे बैठ के खूब नहाई और फिर वापस अपने कमरे में बिना कोई कपड़ा पहने ही आ गई थी।

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मगर यह क्या, कमरे की बत्ती कैसे बन्द हुई? मैं तो इसको जला कर गई थी और फिर जैसे ही मैं बत्ती जलाने लगी तो किसी ने मुझे पीछे से धर-दबोचा और मुझे पटखनी देकर नीचे कालीन पर गिरा दिया था और फिर उसने अपने एक हाथ से मेरा मुँह बन्द किया और फिर वह मुझसे बोला कि, देखो आंटी अगर चुप रहोगी तो तुम्हारी जान बच जाएगी। और फिर मैंने उसे इशारे में हाँ कहा. तो फिर उसने मेरे मुँह से हौले से अपना हाथ हटा लिया था और फिर मैंने उससे थोड़ा कड़क आवाज में पूछा कि, तुम क्या चाहते हो? तो फिर उसने मुझको बताया कि, मैं एक चोर हूँ और तुम्हारे घर में चोरी करने आया हूँ। और फर मैंने पलटकर उसकी तरफ देखा तो उसके मुँह पर कपड़ा बँधा हुआ था मगर साथ ही मैंने यह भी महसूस किया था कि, जैसे उसने मुझे नीचे गिराने में और मुझे दबाकर रखने में जो अपनी ताक़त दिखाई थी, वाकई में वह एक तगड़ा मर्द था। और फिर मेरे दिमाग़ में तभी एक खुराफात ने जन्म ले लिया और फिर मैं उससे बोली कि, कितने की चोरी करोगे हमारे घर में? तो फिर वह मुझसे बोला कि, जितने की हो सके! तो फिर मैंने उसको कहा कि, अगर मैं तुम्हें कुछ पैसे दे दूँ तो क्या तुम मेरे लिए एक काम करोगे? क्या काम करना है? उसने मुझसे पूछा. और फिर मैंने उसको कहा कि, पहले मुझको छोड़ तो सही! तो फिर वह बोला कि, अगर तुमने शोर मचाया तो, मैं यह चाकू तुम्हारे आर-पार कर दूँगा। और फिर मैंने उसको कहा कि, अबे चूतिये, जो यह तू हाथ में लिए फिरता है ना, इससे भी बड़े-बड़े से खेली हूँ मैं, मैं इन छोटी-मोटी चीज़ों से नहीं डरती हूँ। और फिर उसकी पकड़ मुझपर थोड़ी ढीली पढ़ गई थी। और फिर मैंने उसे धक्का देकर नीचे गिरा दिया था और फिर मैंने उठकर कमरे की बत्ती जलाई. और फिर कमरे की बत्ती जलते ही उसने मुझसे कहा कि, ओ तेरे की, आप तो बिल्कुल नंगी हो? और फिर उसने यह कहकर अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया. और फिर मैंने उसको कहा कि, जब तू पिछले 5-7 मिनट से मुझे नीचे दबाकर लेटा हुआ था, तब तुझको नहीं पता चला कि, मैं नंगी हूँ? और फिर वह मुझसे बोला कि, जी मैंने इस बारे में तो ख्याल ही नहीं किया। तो फिर मैंने उसको कहा कि, अच्छा, तो यह जो तेरी पेन्ट में उठा हुआ दिख रहा है, वह क्या है? उससे यह कहकर मैं अलमारी के पास गई और फिर उसमें से मैंने एक सिगरेट का पैकेट और लाइटर निकाला और फिर एक सिगरेट मैंने खुद लगाई और एक उसको दी और फिर मैं जाकर बेड पर बैठ गई थी। और फिर मैंने उसे अपने पास बुलाया और फिर मैंने उसको भी बेड पर बैठने का इशारा किया और फिर वह आकर बेड के एक किनारे पर बैठ गया था और फिर वह मेरी चूत को चोरी-चोरी से देखने लगा था।

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तो फिर मैंने सिगरेट का एक कश लगाकर उससे पूछा कि, क्यों कभी कोई औरत नहीं देखी क्या तुमने? तो फिर वह मुझसे कहने लगा कि, जी देखी तो बहुत है मगर आपकी उम्र की पहली बार देखी है। तो फिर मैंने उसको कहा कि, क्या खराबी है मेरी उम्र में? और फिर वह कुछ भी ना बोल पाया और उसने सिर्फ मुझसे यही कहा कि, आप कुछ काम को कह रही थी मुझसे? और फिर मैं आलथी-पालथी मारकर बैठ गई थी और फिर मैंने उसको कहा कि, देख बात सुन मेरी यह काम तुम पैसे के लिए ही करते हो, और अगर मैं खुद तुम्हें कुछ पैसे दूँ तो क्या तुम मेरा कहा काम करोगे? तो फिर उसने मेरी साफ़ बिना बालों वाली चूत की तरफ देखा और फिर मुझसे पूछा कि, बताओ काम क्या है? और फिर मैंने अपनी पीठ बेड से टिकाई और फिर अपनी टाँगें चौड़ी करके अपनी ऊँगली से अपनी चूत की तरफ इशारा करके उससे बोला कि, तुमको इसे चोदना है। इसे..? कहकर वह हैरानी से उठ खड़ा हुआ। तो फिर मैंने उससे पूछा कि, क्यों मैं क्या तुम्हें औरत नहीं दिखती, जो तुम इतना हैरान हो रहे हो?. मुझे भी उस समय थोड़ा सा बुरा लगा था और फिर उसने मुझसे कहा कि, मगर आंटी, मैंने आज तक कभी इतनी उम्र की औरत के साथ यह काम नहीं किया है। और फिर मैंने उसको कहा कि, देख सबसे पहले तो तू मुझे आंटी मत बोल और दूसरी बात यह है कि, अगर तुम्हें मज़ा और पैसा दोनों ही एकसाथ मिले तो दिक्कत क्या है यार? और फिर उसने फिर से मेरे नंगे बदन को देखा और बोला कि, पैसा कितना दोगी? तो फिर मैंने उसको कहा कि, बोल तुझे कितना चाहिए? तो फिर वह बोला कि, 5 हज़ार. तो फिर मैंने दराज में से पैसे निकाले और बिना गिने उसकी तरफ फैंक दिए। और फिर उसने वह पैसे उठाए और गिने, तो फिर उसने मुझसे कहा कि, यह तो 9 हज़ार है. और फिर मैंने उसको हुक्म सुनाया कि, रख लो और चुप-चाप जाकर बाथरूम में नहाकर आओ और फिर वह बाथरूम में चला गया था।

दोस्तों इसके आगे की कहानी मैं अगले भाग में बताऊँगी तब तक के लिये पढ़ते रहिये “कामलीला डॉट कॉम”

धन्यवाद कामलीला डॉट कॉम के प्यारे पाठकों !!

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