गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 14

सोनी की माँ और भाई antarvasna के आने के बाद kamukta पिंकी ने भी वहां देर तक रुकना सही नही समझा…
वो बाहर निकल गयी, पर जाने से पहले मीनल ने उसका हाथ पकड़ा और उसके कान में फुसफुसा कर बोली : “मुझे पता है की अभी भी तेरे मन में बहुत कुछ चल रहा है, तू फ़िक्र मत कर, इसका इंतज़ाम मैं जल्द ही करूँगी…”

पिंकी का तो चेहरा ही लाल हो गया ये सुनकर…
यानी अभी कुछ देर पहले जो डेमो मीनल दीदी ने उन्हे दिया था, वो अब खुद करके दिखाएगी…
लाला के साथ.
ये मीनल दीदी तो बड़ी चालू निकली
उनकी आड़ में वो लाला से मज़े लेने के मूड में थी.

पर जो भी था, अपनी चूत मरवाना तो पिंकी और सोनी भी नही चाहते थे अभी…
ऐसे में लाला के लंड की करामात वो मीनल दीदी के साथ देखकर कम से कम कुछ मज़ा तो ले ही सकते है..
और शायद मीनल को ऐसा करते देखने के बाद उनमे भी चुदवाने की हिम्मत आ जाए..

यही सब सोचते-2 वो घर चली गयी…

अगली सुबह मीनल अच्छे से तैयार हुई और सीधा लाला की दुकान पर पहुँच गयी…
लाला ने जब दूर से उसे मटकते हुए अपनी दुकान की तरफ़ आते हुए देखा तो वो कसमसा कर अपने लंड (रामलाल) से बोला : “अरे …देख तो रामलाल…वो कौन आ रही है….तेरे दिल की रानी..साली जब से शादी करके गयी है , पहली बार दिखी है…शादी के बाद तो कमाल की लग रही है साली चुदक्कड़ …ज़रा देख तो उसके रसीले आमों को …पहले तो साली चुननी में छुपा कर रखती थी.. और अब साली सीना उभार कर दिखा रही है…

लाला के देखते-2 मीनल के मुम्मे पास आते चले गये और बड़े होते गये…
लाला का हाथ अपनी आदत्नुसार एक बार फिर से अपनी धोती में घुस गया.

लाला :”अरी आजा मीनल आजा…..आज तो बड़े दिनों के बाद दिखाई दी है…लगता है शादी के बाद तेरा मन अच्छे से लग गया है अपने ससुराल में …”

मीनल ने एक कातिल सी मुस्कान लाला को दी और बोली : “मन तो लग ही गया है, पर लाला तेरी याद खींच लाई मुझे , इसलिए मिलने चली आई…”

मीनल के इस बेबाक से जवाब को सुनकर लाला को करंट सा लगा…
आज से पहले उसने ऐसी फ्लर्ट भरी बातो को हमेशा से ही इग्नोर किया था…
शायद तब वो कुँवारी थी
और अपने माँ भाई की इज़्ज़त का उसे डर था.. लाला : “अच्छा किया ये तो तूने जो मिलने चली आई…बता क्या खातिरदारी करूँ तेरी…”

मीनल का मन तो हुआ की लाला से कहे की ये बकचोदी बंद करे और सीधा मुद्दे की बात पर आए…
अंदर चलकर चुदाई कर दे बस..

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पर वो भी मज़े लेकर हर काम करना चाहती थी…
भले ही लंड लेने की उसे जल्दी थी पर इतनी भी नही की खुद ही चुदाई के लिए बोल दे…
उसे तो पहले लाला को तरसाना था
सताना था
और जब वो खुद उसके सामने लंड हाथ में लेकर गिड़गिडाएगा
तब वो अपनी चूत देगी उसे…

अभी तक तो यही प्लान था उसका…
बाकी उपर वाला जाने..

मीनल : “खातिरदारी तो आजकल आप सोनी और पिंकी की बहुत कर रहे हो लाला…सुना है बच्चियों को बड़े क्रीम रोल खिलाए जा रहे है आजकल…”

क्रीमरोल बोलते हुए मीनल की नज़रें लाला के लंड की तरफ थी, जो काउंटर के पीछे छुपा हुआ था…
और लाला के हिल रहे हाथ देखकर मीनल को सॉफ पता चल रहा था की वो साला ठरकी ज़रूर अपने लंड को मसल रहा होगा..

लाला ने जब क्रीम रोल वाला ताना सुना तो वो खिसियाई हुई सी हँसी हंसता हुआ बोला : “अररी वो…वो तो बस ऐसे ही…. तुझे तो पता है की लाला की दिल कितना बड़ा है…बच्चो को क्रीम रोल देने से वो अगर खुश हो जातीं है तो मुझे भी खुशी होती है..”

मीनल ने आँखे तरेर कर कहा : “हमे तो ना खिलाया तुमने आज तक अपना क्रीम रोल…. हमारा बचपन और जवानी तो ऐसे ही निकल गयी…शादी होकर दूसरे शहर चली गयी..पर क्रीम रोल ना चखा मैने आज तक तेरा लाला…”

उसके द्विअर्थी संवाद को सुनकर लाला के चेहरे पर पसीना चमकने लगा…
साली कितनी चालाकी से वो लाला के लंड को लेने की बात कह रही थी…
पर लाला को अभी भी उसपर विश्वास नही हो रहा था, उसकी खुल्ली बातो को सुनकर कहीं वो ऐसा-वैसा काम कर दे और बाद में गाँव भर में बदनामी हो , ये बात लाला हरगिज़ नही चाहता था…
भले ही कम मिले पर आराम से मिले, यही सिद्धांत था लाला का..
जो उसके दोस्त रामलाल ने उसे सिखाया था..

उसकी बातो को परखने के लिए लाला ने झट्ट से मर्तबान से एक क्रीम रोल निकाल कर उसे थमा दिया..

मीनल ने मुँह बनाते हुए वो रोल पकड़ा और उसे बड़े ही बेमन से मुँह में लेकर चूस डाला…
ठीक वैसे ही जैसे कोई लंड को मुँह में लेकर चूसता है…

एक – दो चुप्पे मारने के बाद उसने उसे काटा तो अंदर भरी क्रीम उसके होंठो और मुँह पर लग गयी…
जिसे उसने अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर चाट लिया.. लाला ये सब बड़े ध्यान से देख रहा था…
उसका तो दिल तभी से धाड़-2 बजने लगा था जब उसने रोल को मुँह में लेकर लंड की तरह चूसा था…
ऐसे तो शबाना चूसती है उसके लंड को…

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लाला : “अब बोल…कैसा लगा मेरा क्रीम रोल…”

मीनल ने मुँह बिचका कर कहा : “एकदम ढीला…नर्म सा..मुझे तो कड़क पसंद है…कड़क क्रीम रोल है तो वो चखा लाला…”

लाला का मन तो किया की उसकी घोड़ी बना कर, एक टाँग काउंटर पर रखे और घचाक से अपना लंड उसकी चूत में पेल कर उसे बेदर्दी से तब तक चोदे जब तक वो चिल्लाते हुए अपने मुँह से ये ना बोल दे की ‘बस कर लाला….मार ही डालेगा तू तो…ये कड़क क्रीम रोल तो मेरी जान निकाल रहा है’

पर लाला जानता था की ऐसा करना अभी के लिए पॉसिबल नही है..

पर लाला अब इतनी बात तो समझ ही चुका था की वो लाला के लंड की ही बात कर रही है…

वो काउंटर से बाहर निकल आया..
और बाहर निकलते ही उसकी धोती में जो तंबू बना हुआ था वो मीनल को दिखाई दे गया…

अब चेहरे पर पसीना चमकने की बारी मीनल की थी…
लाला के लंड का उभार उसके शरीर से करीब एक फुट आगे तक निकला हुआ था…
जैसे उसके धोती के कपड़े को किसी खूँटे पर टाँग रखा हो.

धूर्त लाला के होंठो पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी, वो बोला : “अर्रे, देख तो , तेरे माथे पर तो पसीना है…रुक ज़रा, मैं तुझे केम्पा पिलाता हूँ …आजा अंदर…”

इतना कहकर लाला अंदर वाले कमरे की तरफ चल दिया….
और उसके पीछे -2 एक सम्मोहन में बँधी मीनल भी चल दी…

भले ही वो दुनिया भर की प्लानिंग करके आई थी
पर लाला के लंड के उभार ने ही उसकी चूत के पसीने निकाल दिए थे…
अब तो वो पूरी तरह से चुदने को तैयार थी…
बस लाला के कहने भर की देर थी और उसने अपना नाड़ा खोल देना था..

लाला ने उसके हाथ में कोल्ड ड्रिंक पकड़ाई तो उसका हाथ लाला से छू गया…
ऐसा लगा जैसे कोई कठोर चट्टान से घिस्सा लग गया हो उसका…
मीनल तो उसके रंग रूप और मर्दानेपन की कायल होती जा रही थी…

अचानक मीनल को महसूस हुआ की उसकी जाँघ पर कुछ रेंग रहा है…
उसने नीचे देखा तो उसका शरीर काँप सा गया..
वो लाला के लंड का सुपाड़ा था, जो उसकी धोती से निकल कर उसकी जाँघो को टच कर रहा था…

और ये ठीक वैसा ही था, जैसा की पिंकी ने बताया था…
एक दम काला नाग, कलाई जितना मोटा और एकदम कड़क….

लाला ने अपने दाँत निपोर कर कहा : “हाँ तो तू क्या कह रही थी..लाला का क्रीम रोल कड़क नही है… वो तो दुनिया को दिखाने के लिए मर्तबान में रखा है..असली तो गोडाउन में रहता है…”

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मीनल की नज़रें कभी लाला के चेहरे पर जाती और कभी उसके लंड पर…

बेचारी कुछ बोलने के काबिल ही नही रह गयी थी…
ऐसे कड़क रोल को तो मुँह में लेकर चूसने में ही उसका जबड़ा फट्ट जाना है…
और जब ये चूत में जाकर हाहाकार मचाएगा तो क्या हाल होगा
ये तो बताने की ज़रूरत ही नही है….

मीनल का पूरा शरीर और दिमाग़ सुन्न सा हो चुका था…
अगर वो चाहती तो एक ही पल में लाला के लंड को पकड़ कर अपनी चूत में घुसवा लेती..
पर दिमाग़ के एक कोने में कुछ और भी चल रहा था
वो पिंकी को जो वादा करके आई थी, वो भी तो उसे ही पूरा करना था…
और वो पूरा करने के बाद वो पिंकी और सोनी की लाइफ में एक स्टार बन जाएगी, इसका भी उसे विश्वास था…
इसलिए एन्ड टाइम पर उसने अपने आप पर कंट्रोल करते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और बाहर की तरफ चल दी..लाला को तो लगा था की उसके लंड को देखकर वो चुदे बिना नही रह सकेगी…
पर यहाँ तो उल्टा ही हो गया था…
वो तो भाग रही थी…
कही उसे बुरा तो नही लग गया…
लाला को लग रहा था की उसका पासा उल्टा पड़ गया है…
ऐसे अपने लंड की नुमाइश करके उसने शायद कोई ग़लती कर दी है..

और यही सोचकर वो उसके पीछे भागा..

लाला : “अररी सुन तो…क्या हो गया एकदम से तुझे…कोल्ड ड्रिंक तो पी ले पूरी…”

मीनल : “अचानक कुछ ज़्यादा ही गर्मी लग रही है लाला…अब तो पहाड़ी के पास वाले झरने पर जाकर नहाउंगी , तभी ये गर्मी निकलेगी…”

इतना कहकर वो हिरनी की तरह कुलाँचे भरती हुई उसकी आँखो से ओझल हो गयी..

लाला अपना सिर पकड़ कर बैठ गया..

”साला …ये लड़कियां मेरे रामलाल को देखकर भी उसकी तरफ आकर्षित नही होती….यही फ़र्क है औरतों और इन छोरियों में ..बड़ी चीज़ देखकर डर जाती है….इन्हे गर्मी लगने लगती है…बताओ…ये भी कोई बकत है उस सुनसान सी जगह पर जाकर नहाने का…”

और फिर अपनी ही बात सुनकर उसकी आँखे चमक उठी…

”ओह्ह तेरी माँ की चूत …..यानी वो साली मीनल मुझे न्योता देकर गयी है…झरने में चुदाई करवाने के लिए…और मैं लक्कड़ बुद्धि का इंसान, उसकी ये बात नही समझ सका…”

और खुद ही बड़बड़ाता हुआ सा वो उठ खड़ा हुआ और अपनी दुकान का शटर डाउन करके, अपनी बुलेट मोटर साइकल उठा कर पहाड़ी के पास वाले झरने की तरफ चल दिया..

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