गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 13

क्रीम रोल लेकर antarvasna पिंकी सीधा निशि के घर kamukta पहुँच गयी वो उसके हिस्से का रोल उसे देना चाहती थी और आज का किस्सा भी सुनाना चाहती थी.. दरवाजा निशि की बहन मीनल ने खोला

वो उसके हाथो में क्रीम रोल देखकर बोली : “ओहो…लगता है लालाजी की दुकान से आ रही है…”

उसके बोलने के स्टाइल और मुस्कुराहट से सॉफ पता चल रहा था की वो सब जानती है..

पिंकी को निशि पर बहुत गुस्सा आया की उसने ये सब बाते अपनी बहन को क्यों बता दी.

मीनल दीदी ने हँसते हुए उसका हाथ पकड़ा और अंदर खींच लिया..

”अररी, घबरा मत, मैं किसी से नही कहने वाली ये सब…तुझे शायद पता नही है, निशि मुझसे कुछ भी नही छिपाती और न ही मैं उससे….समझी….”

पिंकी का चेहरा पीला पड़ गया…
यानी निशि की बच्ची ने कल उनकी एक दूसरे की चूत चूसने वाली बात भी बता दी है क्या…

उसके चेहरे की परेशानी देखकर वो समझ गयी की वो क्या सोच रही है..

मीनल : “कल जो तुम दोनो ने मज़े लिए थे, वो भी पता है मुझे…ये तो नॉर्मल सी बात है…मैं भी अपनी सहेली बिजली के साथ ये सब किया करती थी…कल जब उसके घर गयी तो फिर से वही किया था हमने…कसम से, पुरानी यादे ताज़ा हो गयी…”

इतना कहकर मीनल ने बड़ी बेशर्मी से अपनी चूत को पिंकी के सामने ही मसल दिया..

मीनल की ये बात सुनकर उसे थोड़ी राहत मिली वरना उसे डर था की कहीं वो उसे डराएगी धमकाएगी और माँ को बताने की धमकी देगी..
पर ये तो अपनी बहन निशि की तरह ही निकली…

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वो मुस्कुरा दी और मीनल के साथ अंदर आ गयी…
निशि नहा रही थी , इसलिए वो उसे लेकर अपने कमरे में आ गयी…
निशि की माँ और भाई खेतो में गये हुए थे..

मीनल ने अंदर आते ही पिंकी से पूछा : “अच्छा सुन, कल निशि बता रही थी की तूने लाला का लंड देखा…बता ना..कैसा था वो…कितना मोटा था….और लंबा कितना था…बता ना…”

मीनल ने जब लंड बोला तभी से पिंकी का शरीर काँप सा उठा था…
उसने तो सोचा भी नही था की कोई लड़की इतनी बेशर्मी से मर्दो के प्राइवेट पार्ट के बारे में बात कर सकती है…

निशि और उसकी बात अलग थी, मीनल दीदी के साथ वो इतनी घुली मिली नही थी, उसके बावजूद वो उससे ऐसे बेशर्मी भरे सवाल पूछ रही थी.

उसका चेहरा गुलाबी हो गया…
आँखे डबडबा सी गयी….
पर कुछ बोल नही पाई वो. मीनल उसके करीब आई और अपनी छातिया उसके कंधे पर ज़ोर से दबाकर , उन्हे रगड़ते हुए बोली : “अररी बोल ना…निशि को तो बड़े मज़े लेकर बताया होगा तूने…मुझे बताने में इतना क्यो शर्मा रही है….ऐसे शरमाएगी तो उसे अपनी चूत में कैसे लेगी….”

लाला के उस ख़ूँख़ार लॅंड को अपनी कोमल चूत के अंदर लेने के नाम से ही बेचारी काँप सी गयी…
उसने घबराकर मीनल को देखा और सकपकाई हुई सी आवाज़ में बोली : “नही दीदी…..वो…वो तो बहुत मोटा है….मेरी चूत में कैसे घुसेगा भला…”

मीनल ने जैसे उसकी नब्ज़ पकड़ ली थी…
वो बोली : “अर्रे…मोटा ही है ना…लंबा तो नही है ना….लंबा होता है तब मुस्किल होत है….”

पिंकी चहककर बोली : “अर्रे नही दीदी…मोटा भी है और लंबा भी…..मैने देखा था….ससुरा इतना मोटा था….और इतना लंबा….”

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उसने अपनी कलाई की मोटाई और लंबाई दिखा दी मीनल को….
जिसे देखकर और सुनकर उसके मुँह में पानी सा आ गया…

वो फुसफुसाई : “हाय …..कमीना लाला…तभी शादी से पहले मुझे भी चोदने वाली नज़रो से देखा करता था….अगर पता होता तो तभी लपक लेती उसके मोटे लंड को…”

पिंकी : “दीदी…..आपने कुछ कहा क्या…”

मीनल : “अर्रे नही री…..बस….तूने जो तारीफ की है, उसके बाद तो मेरा भी मन सा कर रहा है उसे एक बार देखने का….”

पिंकी की आँखे फैल सी गयी….
वो बोली : “दीदी…..आप ये कैसी बाते कर रही हो…आपकी तो शादी हो गयी है….और शादी के बाद तो औरत को सिर्फ़ अपने पति के साथ…”

मीनल ने बीच में ही बात काट दी : “अररी, चुप कर…साला ये कौन सा क़ानून है की पति बाहर मुँह मारे तो सब सही है…पत्नी कुछ करे तो ये क़ानून सामने आ जावत है….”

उसके चेहरे से गुस्सा टपक रहा था…
पिंकी समझ गयी की उसके पति का ज़रूर किसी और औरत के साथ चक्कर है..

पर उसने इस बारे में ज्यादा पूछना सही नही समझा…

वैसे भी लाला के लंड के बारे में बात करने से उसकी चूत में जो रसीलापन आ रहा था, ऐसी इधर उधर की बाते करने से वो चला जाना था…

वो बोली : “एक बात बताओ मीनल दीदी…अगर आपको मौका मिले तो क्या आप लाला के साथ वो सब…”

बात पूरी होने से पहले ही मीनल तपाक से बोल पड़ी : “हाँ हाँ , बिल्कुल….पहले तो मुझे बिस्वास ही नही हो रहा था लाला के लंड के बारे में सुनकर…मेरे पति का तो इत्ता सा है…सोनी ने बताया होगा तुझे…पर तूने भी वही बात की है, यानी बात सच्ची है….अब तो सच में मेरा भी मन कर रहा है उसे अपनी चूत में पिलवाने का…”

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पिंकी : “तो ले लो ना जाकर ….लाला तो 24 घंटे अपना हाथ में पकड़ कर बैठा रहता है…वो तो एक मिनट में ही मान जाएगा…”

मीनल : “अर्रे पिंकी, तू कितनी भोली है रे….तुझे आज एक पते की बात बताती हूँ मैं ….हम औरतो को उपर वाले ने सिर्फ़ सुंदर शरीर और ये रसीले अंग ही नही दिए है…एक दिमाग़ भी दिया है….और इसका इस्तेमाल जितनी जल्दी करना सीख लेगी, उतना ही तेरी लाइफ और जवानी के लिए अच्छा है…”

पिंकी : “मैं समझी नही दीदी…”

मीनल : “मतलब ये है की…मर्द क्या चाहता है ये तो हम सभी जानती है…पर उसे चाहने भर से हमारी जवानी मिल जाए, इतने बेवकूफ़ तो हम भी नही है….मर्द को तरसाकर, उन्हे सताकर, उनका उल्लू बनाकर , बाद में जब उनका लंड लेने में जो मज़ा आता है, उसका कोई मुकाबला नही है…”

पिंकी के कच्चे दिमाग़ में अभी तक कुछ घुस नही रहा था

”पर दीदी…ऐसा करने से तो वो समझेगा की हम सिर्फ़ मस्ती भर का काम कर रहे है…वो कहीं और मुँह मार लेगा तब तक…”

मीनल ने उसकी जाँघ पर हाथ रखा और उसे सहलाते हुए बोली : “यहीं तो तेरी जवानी काम आएगी मेरी बिल्लो….उन्हे सताना है…पागल बना है..पर भगाना नही है…समझी…”

तभी पीछे से आवाज़ आई : “किसको सताने की बाते हो रही है दीदी….”

ये निशि थी जो नहा धोकर बाहर आ गयी थी…..

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