गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 7

और अंत में जब पिंकी antarvasna की चूत ने असली घी kamukta का त्याग किया तो उसके झड़ते हुए शरीर को महसूस करके वो खटिया भी चरमरा उठी… और जैसे ही वो शांत हुई की बाहर की कुण्डी खटक गयी…
पिंकी की माँ वापिस आ गयी थी खेतो से…

पिंकी नंगी ही भागती हुई बाथरूम में घुस गयी और सोनी को सब संभालने का कहकर दरवाजा खोलने को कहा..

सोनी ने जब दराजा खोला तो उसे अपने घर में देखकर उसने इधर – उधर देखा और बोली : “तू यहाँ क्या कर रही है इस बकत ….और ये पिंकी कहाँ है…”

सोनी : “वो मैं उसके साथ खेल रही थी…अब वो नहाने गयी है….बोली जब तक माँ नही आती मैं यहीं रूकूं …”

पिंकी की माँ :” इसकी जवानी में ना जाने कौनसे उबाल आ रहे है आजकल, दिन में दूसरी बार नहा रही है…और ये देखो, मेरा तौलिया कैसे ज़मीन पर फेंका हुआ है…”

कहते हुए उसने तौलिया उठा कर अंदर रख दिया ….
सोनी भी जानती थी की अब यहाँ से निकल जाने में ही भलाई है…
इसलिए उसकी माँ को ये कहकर की पिंकी को उसी के घर भेज देना, वो वहां से आ गयी..

अब उसे और पिंकी को कुछ ऐसा प्लान बनाना था ताकि ये रोज-2 के छोटे-मोटे मज़े से बढ़कर कुछ आगे निकल सके…

और इसके लिए लालाजी से अच्छा बंदोबस्त कोई और हो ही नही सकता था.. सोनी भी जानती थी की अब यहाँ से निकल जाने में ही भलाई है…
इसलिए उसकी माँ को ये कहकर की पिंकी को उसी के घर भेज देना, वो वहां से आ गयी..

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अब उसे और पिंकी को कुछ ऐसा प्लान बनाना था ताकि ये रोज-2 के छोटे-मोटे मज़े से बढ़कर कुछ आगे निकल सके…

और इसके लिए लालाजी से अच्छा बंदोबस्त कोई और हो ही नही सकता था..

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अब आगे
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नहा धोकर पिंकी बाहर आई और उसने लालाजी के घर पर आने की बात माँ को बतायी…
लालाजी का नाम सुनकर तो उसकी माँ भी घबरा गयी..
उसे भी लालाजी के बर्ताव के बारे में अच्छे से पता था और वो ये भी जानती थी की उनके हालात आजकल अच्छे नही चल रहे है इसलिए सूद चुकाने में देरी हो रही है…
अपनी माँ को उनकी सोच में छोड़कर वो सोनी के घर पहुँच गयी…

सोनी के पिता का देहांत कई सालों पहले हो चुका था…
इसलिए उनके खेतो का काम उसका बड़ा भाई और माँ मिलकर संभालते थे…
और दोनो शाम से पहले घर आने वाले नही थे
इसलिए उन दोनो को किसी भी बात की रोक टोक या डर नही था..
सोनी की बहन मीनल आजकल अपने ससुराल से आई हुई थी, वो भी अपने बचपन की सहेली बिजली के घर गयी हुई थी…

सोनी : “पिंकी , एक तो ये तेरी माँ है ना, दिन ब दिन खड़ूस होती जा रही है… मुझे देखते ही ना जाने कैसी आग सी लग जाती है उन्हे…ऐसा ही रहा तो मैने तेरे घर आना बंद कर देना है…”

पिंकी भी ये बात जानती थी की उसकी माँ को सोनी फूटी आँख नही सुहाती …
उनका मानना था की उसके साथ मिलकर वो पूरे गाँव में बिना संगल की गाँय की तरह घूमती रहती है…
उन्हे शायद 1-2 लोगो ने बोला भी था की दोनो के पर निकल आए है आजकल…
अपनी फूट रही जवानी को दोनो गाँव भर में घूमकर दिखाती फिरती है…
इसलिए उन्हे लगता था की सोनी के साथ पिंकी ज़्यादा ना ही मिले तो ही सही है..

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पर उन दोनो की दोस्ती इन बातों को नजरअंदाज करके आगे बढ़ती चली जा रही थी..

पिंकी : “छोड़ ना ये रोज की बातें….पहले ये बता की लालाजी को कैसे काबू में लाया जाए…”

सोनी : “अर्रे, वो लाला तो पहले से ही काबू में है… फ्री में क्रीमरोल कोई ऐसे ही नही दे देता… हा हा”

पिंकी : “मुझे तो लगता है की वो अपना क्रीम रोल देने की फिराक में है….”

सोनी : “हाँ , वही…काला सा…जो तुझे पसंद नही है….”

पिंकी तुनककर बोली : “हाँ , नही है…”

सोनी : “नही है तो पसंद करना पड़ेगा…नही तो लालाजी तेरे काबू में नही आएँगे…”

पिंकी ने सोचने वाला चेहरा बना लिया…
जैसे उसकी बात पर गोर कर रही हो.

सोनी : “देख पिंकी…बात सिर्फ़ मज़े की नही है…बात तेरे पिताजी के सूद की भी है…हो सकता है लालाजी के साथ मज़े लेने के बाद वो तेरे पिताजी का सूद भी माफ़ कर दे…”

पिंकी (थोड़ा गुस्से में ) : “तू कहना क्या चाहती है…लालाजी के सूद के बदले मैं उन्हे अपनी चूत भेंट कर दूँ क्या..मुझे ऐसा-वैसा समझ रखा है क्या तूने..? ”

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