गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 3

लालाजी ने अपने antarvasna लंड के पिस्टन से उसकी kamukta चूत को किसी मशीन की तरह चोदना जारी रखा.. शबाना : “आआआआआहह लालाजी …आज तो कसम से आपके बूड़े शरीर में जैसे कोई ताक़त आ गयी है….किस कली को देख आए आज….अहह”

लालाजी बुदबुदाए : “वो है ना साली….दोनो रंडिया…अपने मोहल्ले की….पिंकी और निशि ….साली बिना ब्रा पेंटी के घूमती है आजकल ……साली हरामजादियाँ …..आज तो कसम से उन्हे दुकान पर ही ठोकने का मन कर रहा था….”

शबाना हँसी और बोली : “उन दोनो ने तो पुर मोहल्ले की नींद उड़ा रखी है लालाजी …. उफफफफ्फ़….उन्हे देखकर मुझे अपनी जवानी के यही दिन याद आ गये…… अहह….. मैने तो इस उम्र में खेत में नंगी खड़ी होकर अपनी चूत मरवाई थी और वो भी 4 लौड़ो से…..और कसम से लालजी, आज भी वैसी ही फीलिंग आ रही है जैसे एक साथ 4 लंड चोद रहे है मुझे….”

लालाजी को वो अपनी जवानी के किस्से सुना रही थी और लालाजी एक बार फिर से पिंकी और निशि के ख़यालो में डूबकर उसकी चूत का बाजा बजाने लगे…

और जल्द ही, पिंकी और निशि के नाम का ढेर सारा रसीला प्रसाद उन्होने शबाना की चूत में उड़ेल दिया…

उसके बाद लालाजी ने अपने कपड़े पहने और बिना कुछ कहे बाहर निकल गये…

दुकान खोलकर वो फिर से अपने काम में लग गये पर उनका मन नही लग रहा था…
अब उन्हे किसी भी हालत में उन दोनो को अपनी बॉटल में उतारना था और उसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार थे.और जल्द ही, पिंकी और निशि के नाम का ढेर सारा रसीला प्रसाद उन्होने शबाना की चूत में उड़ेल दिया…

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उसके बाद लालाजी ने अपने कपड़े पहने और बिना कुछ कहे बाहर निकल गये…

दुकान खोलकर वो फिर से अपने काम में लग गये पर उनका मन नही लग रहा था…
अब उन्हे किसी भी हालत में उन दोनो को अपनी बॉटल में उतारना था और उसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार थे.

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अब आगे
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लालाजी का साहूकारी का भी काम था और गाँव के लोग अक्सर उनसे ऊँचे रेट पर पैसे ले जाते थे…
वैसे तो लालाजी का रोब ही इतना था की बिना कहे ही हर कोई उनकी दुकान पर आकर सूद के पैसे हर महीने दे जाता था, पर फिर भी कई बार उन्हे अपना लट्ठ लेकर निकलना ही पड़ता था वसूली करने …

उनका रोबीला अंदाज ही काफ़ी होता था गाँव के लोगो के लिए, इसलिए जब वो उगाही करने जाते तो पैसे निकलवा कर ही वापिस आते…

लालाजी की पत्नी को मरे 5 साल से ज़्यादा हो चुके थे…
उनकी एक बेटी थी जो साथ के गाँव में ब्याही हुई थी…
शादी के बाद उसने भी एक फूल जैसी बच्ची को जन्म दिया था और वो भी अब 18 की हो चली थी और अक्सर अपने नाना से मिलने, अपनी माँ के साथ उनके घर आया करती थी..

पर जब से लालाजी की बीबी का देहांत हुआ था, उसके बाद से उनकी सैक्स लाइफ में बहुत बदलाव आए थे…
पहले तो उनकी सैक्स लाइफ नीरस थी…
2-4 महीने में कभी कभार उनकी बीबी राज़ी होती तो उसकी मार लेते थे…
पर बीबी के जाने के बाद उनके चंचल मन ने अंगडाइयाँ लेनी शुरू कर दी…
शबाना के साथ भी उनके संबंध उसी दौरान हुए थे…
वो अक्सर उनकी दुकान से समान उधार ले जाती और पैसे लाटाने के नाम पर अपनी ग़रीबी की दुहाई देती…
ऐसे ही एक दिन जब लालाजी उसके घर गये और पैसे का तक़ाज़ा किया तो उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया और लाला जी के कदमो मे बैठ गयी…

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बस एक वो दिन था और एक आज का दिन है, ऐसा शायद ही कोई हफ़्ता निकलता होगा जब लालाजी का लंड उसकी चूत में जाकर अपनी वसूली नहीं करता था .. बदले में वो अपने घर का राशन बिना किसी रोक टोक के उठा लाती..

पर एक ही औरत को चोदते -2 अब लालजी का मन ऊब सा चुका था…
उनके सामने जब गाँव की कसी हुई जवानियां, अपने मादक शरीर को लेकर निकलती तो उनके लंड का बुरा हाल हो जाता था… और ये बुरा हाल ख़ासकर पिंकी की कच्ची अम्बियों को देखकर होता था…

उन दोनो की कामुक हरकतों ने लालाजी का जीना हराम कर रखा था..

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