मम्मी को चोदा पीरियड में

हैल्लो दोस्तों, मेरा antarvasna नाम विवेक है आज मैं आप सभी कामलीला डॉट कॉम के चाहने वालों को अपनी एक सच्ची कहानी और मेरा सेक्स अनुभव सुनाने आया हूँ और मैं उम्मीद करता हूँ कि यह आप लोगों को जरुर पसंद आएगी क्यूंकि दोस्तों यह मेरे जीवन का सबसे मजेदार सेक्स अनुभव है और यह बहुत मस्त भी है।तो आइए मैं आपको अपनी मम्मी के बारे में बताता हूँ।

दोस्तों मेरी मम्मी बहूत ही खूबसूरत है और मम्मी का फिगर तो बहूत ही मस्त है जब वो घर से बाजार जाती है तो गली के सारे मर्द देखते रहते है। उसमें वो एकदम टाइट वाली ड्रेस पहनती है तब तो उसकी गांड और भी पीछे के साइड निकल जाती है और बूब्स तो उसके बाहर आने को होते रहते है और तो और उसकी गांड के गोले जब ऊपर नीचे होते थे तो बहुत ही अलग लगते थे मम्मी की गांड इतनी मस्त थी की उसे एक बार छुकर दबाने का दिल करता था वो साड़ी भी ऐसे पहनती है की पीछे से उनकी कमर साफ दिखती है उनके बड़े बड़े बूब्स को मैं हमेशा ही देखा करता था मैं उनकी तरफ बड़ा ही आकर्षित था। ये एक बार की बात है हम सभी को आगरा जाना था लेकिन पापा को ऑफीस के काम से मुंबई जाना था तो पापा को मैं सुबह में ही एयरपोर्ट पर छोड़ आया और उसके बाद मैं घर पर ही था पैकिंग वगेरा चल रहा था तभी मैंने देखा की मम्मी परेशान होकर कुछ ढूंढ रही है मैंने पूछा मम्मी क्या हुआ क्या ढूंढ रहे हो? तो उन्होंने कहा कुछ नहीं बेटा, लेकिन वो परेशान थी मैंने बोला की शाम को ट्रेन है कुछ देर में निकलना होगा तो सभी समान पैक हो गये ना, तो मम्मी ने कहा की बेटा वो सभी सामान पैक कर रही हूँ लेकिन कुछ सामान भी बाजार से लाने है तो चल वहां से होकर आते है फिर मैंने बोला मम्मी जो सामान लाने है बता दो मैं ले आता हूँ आप पैकिंग करलो कुछ छुट ना जाए, तो वो हिचकते हुए बोली की पेड की पैकेट लेकर आजा मुझे घर में मिल नहीं रही है मैंने थोड़ा सा अनजान बनते हुए कहा की कहा से मिलेगा और कैसा होगा? तो वो थोड़ा सा अजीब तरीके से मुझे देखने लगी फिर बोली की मेडिकल स्टोर पर बोल देना वो दे देगा फिर मैंने स्कूटी की चाबी ली और निकल गया बाजार, जाते समय मैं सोच रहा था की मम्मी की पीरियड आई हुई है वो ट्रेन में कैसा मुहसुस करेगी ये सब, तभी मुझे कुछ आइडिया आया की पीरियड में औरते और भी ज्यादा सेक्स ढूंढती है क्यूँ ना मैं इसका फायदा उठा लूँ इस मौके का पापा भी नहीं जाएँगे साथ में, फिर मैं यही सोचकर के मेडिकल शॉप से पेड की पैकेट माँगने लगा तो उसने पूछ लिया कौन सा साइज़, मुझे मालूम नहीं था तो मैंने बाहर आकर मम्मी को कॉल लगाया और पूछा की मम्मी साइज़ कौन सा लेना है? तो वो बोली की मीडियम ले ले, मैंने शॉप वाले से पूछा सबसे छोटी साइज़ की दे दो उसने दे दिया और साथ में मैंने एक पैकेट कॉन्डोम का भी ले लिया वहां से घर आते आते शाम हो गई, मैंने बोला की मम्मी अब निकलना है हमें, तो वो भी बैग पैक कर चुकी थी और पेड वाला पैकेट लेकर अंदर चली गयी मैं समझ गया चूत से खून आ रहा होगा लगाने गयी है, जब वो आई तो कुछ सोच रही थी मैंने देखा वो बार बार अपने पजामे की तरफ देख रही है और मैंने पूछा क्या हुआ मम्मी, तो मम्मी ने कहा की बेटा ये तू कुछ ज्यादा ही छोटा ले आया है तो मैंने उसे बोल दिया मम्मी आपने मीडियम ही माँगा था, तो उन्होंने कहा की छोड़ अब बस ये साइड से लीक ना हो जाए मैंने बोला कैसे लीक होगा मम्मी दिखाओ तो ज़रा, तो वो मुझसे घुस्से से बोली छोड़ चल निकलते है।

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हम सब निकले मैंने कैबिन पहले से ही बुक कर लिया था और रेलवे स्टेशन के लिए निकल गये जब हम रेलवे स्टेशन पर पहुँचे तो हमें वहां प्लॅटफॉर्म पर जाना था फिर हम जल्दी से अपनी ट्रेन में जाकर के सीट पर बैठ गये और मम्मी खड़ी थी तो मैंने बोला मम्मी बैठ जाओ तो उन्होंने मुझे इशारा किया नीचे की साइड मैंने देखा नीचे उनके पजामें के बगल में हल्का सा रेड रेड हो गया है वो शरमा रही थी और पजामें को थोड़ा नीचे करके बैग से कुछ निकालने लगी उन्होंने एक दूसरी पजामी को निकाला और एक पेड, फिर बाथरूम के बगल में चली गयी वहां से आई फ्रेस होकर और मुझे घुस्से से घूरने लगी अब तक हम थोड़े से इस पीरियड को लेकर सब कुछ भूल चुके थे तो मम्मी ने कहा की मुझे सोना है मुझे दर्द हो रहा है तो मैंने कहा ठीक है आप सो जाओ, फिर मम्मी सो गयी कुछ देर के बाद मैंने देखा मम्मी का वो का वो कुछ ज्यादा ही छोटा वाला पेड था तो वो सो नहीं पा रही थी और ना ही दोनों पैर को सही से रख पा रही थी तो मैंने कहा की मैं कोई मदद करूं तो मम्मी बोली की हाँ थोड़ा सा पैर को दबा दो मैं अपनी सीट से उनकी सीट पर गया और उनके पैर को दबाने लगा कैबिन में कोई नहीं था फिर मैंने मम्मी को कंबल ओढ़ा दिया उसके बाद मैं पैर दबाते दबाते उनके थोड़े ऊपर तक पहुँचा वहां थोड़ी बहूत गर्मी थी जिससे मम्मी कभी दोनों पैर को आपस में रगड़ रही थी।

मैं उसके पैर दबा ही रहा था की मुझे कुछ गीला महसूस हुआ तो लेकिन मम्मी कुछ नहीं बोली मैं थोड़ा से मजे लेने के लिए और वही पर छुने लगा दोनों पैरो के बीच में गीला काफ़ी हो गया था तब एक बार उन्होंने दोनों पैरो को ज़ोर से दबाया और उसी में मेरा हाथ उनके दोनों पैरो के बीच में फँस गया और मुझे लगा की पेड साइड से लीक हो रहा है मैंने कान में बोला की मम्मी आपका पेड ज्यादा गीला हो गया है तो वो बोली हाँ मुझे भी लगा तो मैंने कहा मम्मी इस तरह से आपकी पजामी खराब हो जाएगी आप नई वाली पजामी पहन लो तो वो तो उसने पहले सोचा फिर बैग से दुसरे पजामी निकालकर के चली गयी, जब वो पहनकर के आई तो पेड नहीं पहना हुआ था नीचे और सोने लग गई तब तक खाना भी आ गया था तो मम्मी बोली की मेरा मन नहीं है खाने का तो मैंने खाना खाया और अपना भी बिस्तर लगा लिया और पूछा की मम्मी अब तो दर्द नहीं हो रहा है ना तो वो बोली की हाँ बस थोड़ा सा मैं उनके पैर दबा रहा था फिर मैंने उनको पीठ के बल सो जाने को बोला। तो मैं उनके पैर के पास बैठकर उनसे पूछा की मम्मी इसमें ज्यादा दर्द होता है क्या? तो वो बोली की हाँ और मैं पैरों को टच भी कर रहा था दबाने के साथ साथ सहला भी रहा था बीच बीच में, फिर मैंने थोड़ा ऊपर तक टच किया जब उनकी जांघो को टच किया तो मम्मी सिहर गयी और मुझे देखने लगी तो मैंने अनजान बनते हुए मैं और ऊपर तक पैर दबाने लगा और मेरा हाथ उनके पेंटी से टच हो गया जो की बिलकुल गीली थी और अंदर में पेड भी नहीं था मैंने मम्मी को देखा तो आंख बंदकर के लेटी हुई थी मैं पैर दबाने के बहाने उनकी पेंटी को टच करता रहा बार बार फिर मम्मी बोली की चल तू सो जा मुझे वॉशरूम जाना है और वो चली गयी मैं मन मारकर के सो गया। अगली सुबह जब हम जागे तो पापा बोले की शादी मैरिज होल पर अभी नहीं जाना है वही रुक जाओ और कही होटल में तब तक मैं भी आ जाऊंगा वहां से सब साथ में चलेंगे हमने वही एक होटल में कमरा ले लिया, जाते ही मम्मी बाथरूम में गयी और मैं बेड पर लेटकर आराम करने लगा तब मम्मी आई और बोली की जाकर के बाजार से मीडियम पेड लेकर आ मैंने कहा की इससे ही काम चला लो तो वो बोली साइड से कितनी लीक हो रही है देखा और अभी ये 2 दिन और रहेगा तो मैं बोला ठीक है शाम को ले आऊंगा तो मम्मी बोली ठीक है हमने एक ही कमरा लिया था तो वही मम्मी भी आराम करने लगी। फिर कुछ देर में मुझे मालूम हुआ मम्मी सो गयी थी और हल्का हल्का सा ब्लड लगा था उनके सूट पर तो मैं सोचने लगा की कही होटल के बेड पर ना धब्बा लग जाए तो मैंने सोचा मम्मी को उठाकर के नीचे टावल डाल देता हूँ। मैंने मम्मी को गांड की तरफ से पकड़कर उठाया और टावल रखने को कहा तो मालूम हुआ मम्मी ने अंदर में ना ही ब्रा डाली है ना ही पेंटी, और मैं धीरे धीरे उनको छुने लगा तो वो मोन करने लगी मैं उनको और थोड़ा सा छुने लगा वो मेरे हाथो को दबाने लगी और मैं उनकी बगल में लेट गया और धीरे से कहा की आपकी जांघो को साफ कर दूँ हल्का सा ब्लड दिख रहा है उन्होंने कहा हाँ उनको पता था की मैं क्या कह रहा हूँ फिर मैं नीचे गया उनका सूट ऊपर उठाया और उनकी कमर तक और पैर से उनकी दोनों टाँगे को अलग अलग किया और टावल से उसे साफ किया और उसको सहलाने लगा। वो मना नहीं कर पाई और पीरियड के होते हुए भी वो तड़पने लगी फिर अचानक से मुझे बोली अब नहीं रहा जाता मुझे चोद बेटा मैं एक उंगली उनकी चूत में डालकर के अंदर बाहर करने लगा पीरियड के वजह से चूत इतनी गरम होती है ये अगर आपको नहीं पता, मैं आपको बता रहा हूँ कभी पीरियड में उंगली डालकर के देखना किसी की चूत में और उस समय वो रह ना पाई और खून लगी हुई उंगली मेरी बाहर आ गई। फिर मैंने बैग से कॉन्डोम निकाला और उनकी चूत पर रखकर के सहलाया उसके दोनों होठों के बीच में वो और तड़पने लगी मैंने उन्हें और तडपा के पूछा बेटे से चुदना है तो वो बोली कोई भी हो अभी बस चोद ले मुझे, मैंने ज्यादा वेट ना करते हुए हल्का सा धक्का लगाया और आधा लंड उनकी चूत में उतार दिया। दोस्तों यह सेक्स स्टोरी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

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वो दर्द के मारे मुझे नाख़ून मारने लगी लेकिन वो पल भी अच्छा था वो और अपनी गांड को उठा उठाकर के चुदाने लगी और आहह… अया… चोद ले बेटा मुझे किस करने लगी और बस कुछ ही देर में, मैं जोर जोर से धक्के देने लगा उनकी चूत में और वो झड़ गई और उन्होंने अपनी चूत से पानी निकाल दिया मैं भी उनके सामने ज्यादा देर तक ठीक नहीं पाया और मैंने भी कॉन्डोम के अंदर ही अपना पानी निकाल दिया। दोस्तों मैंने भी उस समय उनको तीन बार जमकर चोदा और फिर पापा आ गये थे। दोस्तों मैं अब भी उनकी जमकर चुदाई करता हूँ जब पापा घर में नहीं रहते, और वो भी मुझसे अपनी चूत और गांड मरवाती है बड़े मजे से।

धन्यवाद कामलीला डॉट कॉम के प्यारे पाठकों !!

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