देवर ने मेरी चूत का घंटा बजाया

हैल्लो दोस्तों, Antarvasna आप लोगों की तरह में भी कामुकता डॉट कॉम पर लगातार सेक्सी कहानियों के मज़े लेती हूँ। में पिछले कुछ सालों से जुड़ी हुई हूँ और अब तक मैंने ना जाने कितनी कहनियों के मज़े लिए है। यह सभी बहुत रोचक होने के साथ साथ बड़ी ही मज़ेदार होती है और आज में अपनी भी एक उस सच्ची घटना को लेकर आई हूँ जिसके बाद मेरा पूरा जीवन बिल्कुल बदल गया और अब में अपनी इस कहानी को शुरू करती हूँ। दोस्तों मेरा नाम नेहा है और मेरी शादी तीन साल पहले हुई थी। मुझे अब एक डेढ़ साल की बच्ची भी है और हमारे परिवार में मेरी सास, ससुर, देवर, उसकी पत्नी, में और मेरे पति एक साथ ही रहते है। मेरे बड़े देवर एक बहुत बड़ी प्राइवेट कंपनी में मेनेजर के पद पर है और उनकी पत्नी मुम्बई की रहने वाली है। वो दोनों ही अपने स्वभाव से बड़े प्यारे है, मेरी देवरानी दिखने में बहुत सुंदर है और देवरजी का तो क्या कहना वो तो हर रोज सुबह 5:30 बजे उठकर पास वाले मैदान में जाकर कसरत करते है, लेकिन उनका स्वभाव थोड़ा सा गरम होने की वजह से घर के सभी लोग उनसे बहुत डरते है, मेरे पति भी एक कंपनी में है और उनके काम की वजह से उनको लगातार कई घंटो तक खड़े ही रहकर काम करना पड़ता है। दोस्तों हमारी सेक्स लाइफ पहले साल तो बहुत अच्छी रही और हम दोनों ने रात में दिन में जब चाहे तब हम सेक्स का बड़ा मस्त आनंद उठाया, लेकिन जब मेरे एक लड़की हो गयी तब से मेरे पति मुझसे जाने किस बात से नाराज़ हो गये, ऐसा मुझे लगता था कि उनके मुहं से मैंने कुछ ऐसा नहीं सुना था और इसलिए हमारी सेक्स लाइफ भी बहुत बोरिंग हो गयी, लेकिन मेरे देवरानी को देखती थी, वो बड़ी खुश रहती, इसका मतलब देवरजी और वो रोज सेक्स करते थे।

एक दिन घर में कोई नहीं था और उस समय में और मेरी देवरानी दोनों ही थे सभी लोग बाहर गये थे देवरजी काम पर और मेरे पति भी अपने काम पर थे, दोपहर में खाना खाने के बाद में और मेरी देवरानी दोनों टीवी पर एक हिन्दी फिल्म देख रहे थे। तो अचानक एक सेक्सी द्रश्य आ गया जिसमे लड़का, लड़की का चुंबन ले रहा था। उसी समय मैंने अपनी देवरानी की तरफ देखा तो वो बहुत शरमा गयी। तो मैंने उससे कहा इसमे शरमाने की क्या बात है? क्या देवरजी कभी आपका चुंबन नहीं लेते क्या? तो वो बोली अरे यह तो कुछ नहीं, वो तो मुझे ऐसा किस करते है कि तुम पूछो ही मत, उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरी उत्सुकता बढ़ गई। में तुरंत उठकर बाथरूम के बहाने जाकर देख आई कि बाहर कोई नहीं है और वापस उनके पास आकर बैठ गई। अब मेरा एक हाथ उनके गोरे मुलायम पेट के ऊपर था। मैंने उन्हे पूछा कि आप दोनों कैसे सेक्स करते हो? पहले तो वो यह बात बताने से शरमा रही थी, लेकिन वो द्रश्य देखकर वो भी खुल गई और बताने लगी कि रूम में जाते ही वो बड़े प्यार से मुझे अपनी बाहों में ले लेते है और फिर हम सोफे पर बैठते है। उसके बाद वो मुझे चूमना शुरू कर देते है, पहले तो वो मेरे होंठो पर चूमते है। फिर धीरे धीरे वो अपनी जीभ को मेरे मुहं में डालना शुरू करते है और फिर में भी अपनी जीभ से उनकी जीभ को चूसने लगती हूँ।

दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरी सांसे तेज हो गई और में गरम होने लगी थी और मेरी पेंटी भी गीली होने लगी थी। मैंने उनके पेट पर हाथ फेरना शुरू कर दिया था और वो भी अब मुझे खुलकर वो बातें बता रही थी। फिर कुछ देर मुझे चूमने के बाद वो मेरे बूब्स को सहलाकर एक एक करके दोनों को अपने मुहं में लेते है और अब मैंने यह बात सुनते हुए उनके बूब्स को हाथ लगाया तो वो एकदम चकित हो गयी और वो मुझसे बोली आप यह क्या कर रही हो? तो मैंने कहा कि में तुम्हारे बूब्स का आकार छूकर देख रही हूँ। अब वो कहने लगी उसके बाद वो धीरे धीरे मेरे पूरे बदन पर किस करते है यह करने के बाद वो मेरे पेंटी पर किस करते करते पेंटी को उतारकर वो अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर डालकर चूत को चूसना शुरू करते है। दोस्तों यह बात सुनकर मेरा बदन अब पूरी तरह से गरम हो चुका था, इसलिए उसी समय मैंने उनका हाथ अपने बूब्स पर रख दिया और में उनसे बोली मेरे बूब्स का आकार छूकर देखा तो उन्होंने अपना हाथ मेरी छाती पर घुमाना शुरू कर दिया और मेरे बूब्स उनसे बहुत बड़े आकार के थे, तभी वो मुझसे कहने लगी कि उन्हे (देवरजी को) तो बड़े बूब्स बहुत पसंद है, यह बात सुनकर में तो मन ही मन देवरजी को याद करने लगी और फिर उन्होंने मुझे बताया कि उनका सेक्स कम से कम 40 मिनट तक चलता है, जिसमें वो हर बार अलग तरह से चुदाई करके मज़ा लेते है। अब उन्होंने यह भी बताया कि वो देवरजी को वो ठीक तरह से चुदाई के साथ अपना साथ नहीं दे पाती क्योंकि वो बहुत पतली है और देवरजी गठीले बदन के है।

दोस्तों में तो बिल्कुल हैरान हो गयी कि 40 मिनट तक वो दोनों सेक्स का मज़ा लेते है, जबकि मेरे पति तो 8-10 मिनट में ही झड़ जाते है। मैंने अब उनके बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया और धीरे धीरे में उनकी चूत के पास जाने लगी। उनकी चूत बहुत गोरी थी और खास करके साफ थी, वो कहने लगी कि देवरजी को साफ चूत बहुत पसंद है, क्योंकि चाटने में बहुत मज़ा आता है। दोस्तों मैंने तो अब ठान ही लिया कि जिंदगी में अगर मुझे कोई अच्छा मौका मिला तो में अपने देवरजी से ज़रूर अपनी एक बार चुदाई के मज़े लेकर रहूंगी, तभी मुझसे देवरानी बोली क्यों क्या सोच रही हो उनसे चुदवाना चाहती हो क्या? में यह बात सुनकर शरमा गयी और मैंने ना कह दिया और फिर हम दोनों उठ गये जिसके बाद वो नहाने चली गयी, लेकिन में अब भी अपने देवरजी के बारे में ही सोचते हुए अपनी चूत को सहलाने लगी। उसी दिन में मन ही मन अपना बदन देवरजी को सोंप चुकी थी, क्योंकि मेरे पति की सेक्स में रूचि भी अब बहुत कम हो गई थी और में जिस मौके की तलाश में थी, वो मौका भी बहुत जल्दी आ गया। एक दिन मेरी सास के भाई के लड़के की शादी थी वो एक छोटे से गाँव में थी वहां पर जाने के साधन की कमी की वजह से सभी लोग कैसे जाए, यह हमारी बहुत बड़ी परेशानी थी।

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फिर देवरजी बोले कि में तो नहीं आ सकता, क्योंकि मुझे अपने काम से छुट्टी नहीं है और उन्होंने एक गाड़ी इंतजाम कर दिया। अब मेरे मन में विचार आया कि क्यों ना में भी घर पर ही रुक जाऊं? और फिर मैंने अपनी चुदाई की प्यास को बुझाने का पक्का इरादा बना लिया, सुबह होते ही मेरे पति मुझसे बोले चलो जल्दी से तैयार हो जाओ, हमें जल्दी निकलना है, लेकिन मेरी तो बिल्कुल भी इच्छा नहीं थी और में कोई अच्छा सा बहाना ढूंढने लगी। में अब सोचते हुए बाथरूम में चली गयी और नहाते समय सोचने लगी तभी उसी समय साबुन से मेरा हाथ फिसल गया और अब मेरे मन में विचार आ गया और मैंने वैसा ही किया साबुन को दरवाजे के बाहर रखकर मैंने उसके ऊपर अपना पैर रख दिया साबुन की वजह से में फिसलकर गिर पड़ी और रोने लगी। फिर मेरे पति मुझे उठाकर पूछने लगे क्या हुआ? तो मैंने जवाब दिया कि मेरा पैर फिसल गया और मुझसे दर्द है उठकर चला भी नहीं जा रहा। अब उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठाया और बेड पर लेटा दिया, मैंने रोना शुरू कर दिया। तभी वो कहने लगी कि जाने दो में शादी में नहीं जाता, लेकिन मैंने उनको कह दिया कि आपको तो जाना ही पड़ेगा, वो बोले हाँ ठीक है में तुम्हारे कहने पर चला जाता हूँ, लेकिन तुम अपना ध्यान रखना और फिर वो सभी शादी के लिए निकल पड़े। उनके जाने के बाद घर में और मेरे देवर थे। अब में अपने पैर को लेकर चिल्ला पड़ी कि मेरे पैर में बहुत तेज दर्द हो रहा है, वो मेरे पास आकर रुक गये और वो मुझसे कहने लगे कि चलो डॉक्टर के पास चलते है। फिर मैंने उनको बोला कि डॉक्टर के पास नहीं, इतनी सुबह डॉक्टर कहाँ मिलेगा? वो मुझसे कहने लगे क्या में तुम्हारे पैर की मालिश कर दूँ? यह बात सुनकर मैंने तुरंत हाँ कर दिया, क्योंकि ऐसा मौका फिर बार-बार नहीं आने वाला था और में इस मौके को गँवाना नहीं चाहती थी।

फिर वो तेल को गरम करके मेरे पास आकर मुझसे पूछने लगी कि दर्द कहाँ हो रहा है? में शरमा गयी, वो बोले कि अरे शरमाने की क्या बात है, अगर दर्द की जगह नहीं बताओगी तो में कहाँ मालिश करूँगा? अब मैंने उन्हे बताया कि घुटने के ऊपर और कमर में भी मोच आई है। तो वो बोले कि हाँ ठीक है, लेकिन उस समय घर में मेरे और उनके अलावा कोई भी नहीं था इसलिए वो थोड़ा सा टेंशन में थे, इसलिए मैंने उनसे पूछा क्या बात है? तो वो बोले कि में तुम्हे कैसे मालिश करूं? तुम तो मेरे भाई की बीवी हो और पराई औरत को तो में हाथ भी नहीं लगाता। तभी मैंने झट से बोला कि रहने दो मेरी जान भी चली जाए तो आपको क्या? दर्द तो मुझे हो रहा है, होने दो में भी डॉक्टर के पास नहीं जाउंगी, तुम मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो। फिर वो बोले नहीं आपने गलत सोच लिया, मेरा कहने का मतलब यह था कि अगर किसी ने हमें देख लिया तो? मैंने कहा कि इस पूरे घर में हम दोनों के अलावा कोई भी नहीं है इसमे डरने की क्या बात है? यह कहने से वो मालिश करने को तैयार हो गये और उन्होंने मेरी मालिश शुरू कर दी और जैसे ही उन्होंने मुझे छुआ तो मेरा पूरा बदन गरम हो गया और कांप उठा। उनके हाथ का स्पर्श बहुत ही अजीब था, लेकिन मुझे वो अच्छा लगाने लगा और मैंने जानबूझ कर पेंटी, ब्रा नहीं पहनी थी।

अब वो मेरे पैर की मालिश कर रहे थे, मैंने उनसे कहा कि मुझे घुटने के ऊपर मोच आई है तो वो शरमाकर बोले कि कोई देख लेगा। फिर मैंने उनको कह दिया कि दरवाजा बंद कर दो उसके बाद मालिश करो, तब उन्होंने जाकर दरवाजा बंद कर दिया और तेल की बोतल लेकर मेरे कपड़ो को घुटने के ऊपर उठाया। जैसे ही उन्होंने ऊपर उठाया तो वो एकदम चकित रह गये शायद उनको मेरी चूत दिखाई दी होगी और अब वो भी जमकर मालिश करने लगे। उसी समय मेरी नज़र उनके लंड के ऊपर पड़ी तो वो भी टावल से बाहर निकलने को बेताब था फड़फड़ा रहा था। अब सही मौका देखकर मैंने अपनी दोनों जांघे थोड़ी फैला दी जिसकी वजह से उनको मेरी चूत के दर्शन अब बड़े आराम से हुए और वो भी देखकर थोड़े गरम हो गये, इसलिए वो अब बड़े ही सेक्सी अंदाज में मालिश करने लगे थे। उसी समय मैंने भी थोड़ा सा सोने का नाटक करना शुरू किया और जब उनको लगा कि में सो चुकी हूँ तो तब उन्होंने हिम्मत करके धीरे धीरे मेरी जांघो से लेकर अब मेरी चूत तक भी अपना हाथ पहुंचाना शुरू कर दिया। और कुछ ही मिनट में मेरी तो चूत से पानी निकल गया। में झड़ने लगी और शायद उन्हे भी उसकी गंध आ गयी थी और उन्होंने फिर से मेरी चूत को अपने हाथ से छूना शुरू किया और थोड़ी ही देर में उनकी उंगली मेरी चूत की दीवार से टकराने लगी। अब में ठंडी साँसे भरने लगी थी। फिर देवरजी ने मुझे उठाने का प्रयास किया और वो मुझसे बोले कि नेहा उठो, लेकिन में अब सोने का नाटक करने लगी थी। उन्होंने शायद समझ लिया कि में भी चूत को छूने का आनंद ले रही हूँ। अब उन्होंने वापस अपना वो खेल शुरू कर दिया, लेकिन अब वो सभी काम छोड़कर सीधे अपनी ऊँगली से मेरी चूत की चुदाई करने लगे थे। वो लगातार अपनी उंगली को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहे थे, जिसकी वजह से कुछ देर बाद में वापस झड़ गयी और मेरा पूरा पानी उनके हाथ पर आ गया और उन्होंने वो पूरा चाट लिया। तभी अचानक से वो मेरे गाउन के अंदर घुस गये और अब वो मेरी चूत को चाटने लगे तो में तो खुशी से पागल होने लगी थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब मैंने गाउन को उनके सर से हटा दिया और में उठ गयी तो वो तुरंत एक तरफ हो गये और माफ करने के लिए बोलने लगे। वो कहने लगे कि मुझसे ग़लती हो गयी। अब मैंने उन्हे पूछा क्या उनको मेरी चूत पसंद आई, मेरी चूत देवरानीजी से भी अच्छी है? तो वो मेरे पास आ गये और मुझे किस करते हुए बोलने लगे कि तेरी चूत तो स्वर्ग है, इतनी सुंदर चूत मैंने कभी नहीं देखी। अब में बोली तो फिर चाटना शुरू करो, देर क्यों कर रहे हो? अब उन्हे मेरे मुहं से यह बात सुनकर जोश आ गया और उन्होंने मेरे गाउन को उतारा और अब उन्होंने मेरे बूब्स को चूसना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से में तो पागल हो गयी थी, इसलिए मैंने भी उन्हे किस करना शुरू किया और हम दोनों के सर पर सेक्स का भूत सवार था और वैसे हम दोनों चुदाई के प्यासे भी थे। मेरे बूब्स को चूसते चूसते वो एक बार फिर से मेरी चूत की तरफ बढ़ गये और वापस उन्होंने मेरी चूत को चूसना शुरू कर दिया, में भी उनका 7 इंच का लंड पकड़कर उनसे बोली कि मुझे भी उसका यह मुहं में लेना है। अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये और एक दूसरे का चाटने चूसने लगे। में तीसरी बार झड़ गयी और मेरे पति के साथ मुश्किल से एक बार झड़ जाती, लेकिन देवर के साथ में चुदाई के पहले ही तीसरी बार झड़ी थी।

फिर हम दोनों उठकर खड़े हो गये। वो मुझे अब भी किस कर रहे थे और उनके किस करने का स्टाइल ही बहुत सेक्सी था और फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और वो मुझे बाथरूम में ले जाने लगे। अब मैंने उनसे कहा कि इधर ही आप जल्दी से मुझे चोदो ना, जल्दी से मेरी इस आग को शांत कर दो, तो वो बोले धीरज रखो मेरी रानी, तुम्हे इतनी भी क्या जल्दी है और फिर बाथरूम में जाकर उन्होंने पानी शुरू कर दिया, तब मैंने उनसे पूछा क्या करने का इरादा है? तो वो बोले कि उन्होंने पहली बार जब देवरानी को चोदा था तो ऐसे ही पानी के नीचे ही चोदा था। अब मैंने उनसे पूछा कि देवरानी उस रात को क्यों ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी? यह बात सुनकर वो एकदम चकित हो गये और वो मुझसे बोले तुमने कब सुन लिया? तो मैंने उन्हे अब मेरे सारी कहानी बता दी कैसे में कब से प्यासी रही और फिर मैंने कैसे अपनी चुदाई उनके साथ करने का विचार किया और हम दोनों कैसे आज इस मोड़ पर आ गये? तो वो मेरे मुहं से वो पूरी बात सुनकर खुश होकर मुझे चूमने लगे और उन्होंने पानी के नीचे मुझे झुककर खड़ा रहने को कहा और जैसे ही में झुकी वैसे ही उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के मुहं पर रख दिया और में डरने लगी कि कहीं ये आज जोरदार धक्का देकर मेरी चूत को ना फाड़ दे, लेकिन उन्होंने धीरे धीरे से अपने लंड को मेरी चूत में डालकर मुझे चोदना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से में तो अब मस्ती मज़े के आसमान पर थी, क्योंकि उनका मोटा तगड़ा लंड मेरी चूत में धीरे धीरे करते हुए पूरा अंदर बाहर हो रहा था। मेरी चूत की दीवारों से लंड की रगड़ होने से ही में उमंग से भर जाती और उनका लंड मेरी चूत को घिसकर फैलाकर अपने आने जाने के रास्ते को साफ करता जा रहा था और फिर कुछ देर बाद उनकी धक्को की स्पीड भी अब धीरे धीरे बढ़ने लगी थी, लेकिन में तो मस्त मज़े ले रही थी और उनका पूरा पूरा साथ दे रही थी, लेकिन अचानक उन्होंने बहुत ज़ोर से धक्के देकर मुझे चोदना शुरू कर दिया और में वो स्पीड देखकर हैरान हो गयी, क्योंकि मेरी जिंदगी में मैंने कभी भी ऐसे दमदार धक्के देकर चोदने वाला नहीं देखा था।

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अब मैंने उनसे बोला कि प्लीज थोड़ा धीरे धीरे करो आईईईईईई ऊउईईइ लेकिन वो कोई भी बात को सुनने के मूड में नहीं थे। वो अपनी मस्ती में आकर धक्के देने लगे और फिर कुछ देर बाद मैंने भी उन्हे उकसाना शुरू किया। में उनसे कहने लगी आह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से ज़ोर आईईई आऊच्च। उनके लंड ने तो मेरी चूत को ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए वो जोश में आकर लगातार एक जैसे ही धक्के देने लगे थे। फिर उन्होंने कुछ देर बाद मुझे वहीं पानी के नीचे लेटा दिया और वो मेरे ऊपर लेट गये। मेरे दोनों पैरों को उन्होंने अपने कंधे पर रख लिया और अपना 7 इंच का लंड मेरी चूत में डालने लगे लंड डालते टाइम ही मेरी चूत से पानी बाहर आने लगा, लेकिन फिर भी उन्होंने ज़ोर लगाते हुए अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया और अब वो मेरे दोनों पैरों को पकड़कर वैसे ही तेज धक्के देकर उन्होंने मुझे चोदना शुरू किया। मेरी तो पूरी प्यास बुझ चुकी थी, लेकिन मेरा राजा अभी भी प्यासा था और मैंने नीचे से अपने कूल्हों को हिलाकर उन्हे साथ देना शुरू कर दिया। अब वो मुझसे बोले क्या तुम मुझे चोदना चाहती हो? तो मैंने तुरंत बोला कि हाँ में भी एक बार तुम्हे चोदना चाहती हूँ। मेरे मुहं से यह बात सुनकर उन्होंने झट से अपने लंड को मेरी चूत के बाहर निकाल लिया, जिसके बाद हम दोनों वापस बेडरूम में आ गये, लेकिन उन्होंने मुझे बाथरूम से वहां तक पैदल चलकर नहीं आने दिया वो मुझे अपने लंड पर बैठाकर ही बेडरूम तक लेकर आए और उसके बाद वो एकदम सीधे लेट गये और फिर मैंने उसके ऊपर बैठकर धीरे धीरे उनका लंड अपनी चूत के अंदर लेना शुरू कर दिया। पहले तो मुझे बहुत दर्द हो रहा था, क्योंकि इतनी देर तक मैंने कभी भी सेक्स नहीं किया था और हमें चुदाई करते हुए पूरे तीस मिनट हो चुके थे, लेकिन कुछ देर के बाद मुझे मज़ा आने लगा था और में चुदाई करते हुए मज़े के स्वर्ग में जा पहुंची थी।

फिर मैंने धीरे धीरे करते हुए थोड़ी अपने ऊपर नीचे होने की स्पीड को बढ़ा दिया। तो देवर बोले क्या बात है, तुम्हे फिर से जोश चड़ गया क्या? मैंने बोला कि आपका लंड है ही इतना गरम मस्ती देने वाला कि में तो पागल हो चुकी हूँ। ऐसा चुदाई का मज़ा मुझे आज पहली बार मिला है। दोस्तों मुझे भी नहीं पता था कि इतनी ताक़त मुझमे कहाँ से आ गई थी? अब उन्होंने भी मुझे नीचे से धक्के देकर चोदना शुरू कर दिया और वो ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगे। मुझे तो इतना मज़ा आ रहा था कि में क्या बताऊँ में वापस झड़ गयी और उसी समय वो मुझसे बोले कि अब मेरा भी निकलने वाला है। फिर मैंने उनसे कहा कि आप इसको मेरे अंदर ही डाल देना, प्लीज़ बाहर मत निकालना, वो हंसते हुए बोले हाँ ठीक है मेरी जान जैसा तुम चाहती हो में वैसा ही करूंगा और वापस उन्होंने ज़ोर से धक्के देकर चोदना शुरू किया, उन्होंने अपने धक्को की स्पीड को इतना बढ़ाया कि उनके हर एक धक्के से मेरे बूब्स, मेरी कमर और मेरा पूरा बदन हिलने लगा और मेरी चूत में बड़ा अजीब सा दर्द भी होने लगा, लेकिन तब भी देवरजी रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे और फिर कुछ धक्के झेलने के बाद मेरी चूत में मुझे कुछ गरम सा महसूस हुआ। मैंने नीचे की तरफ देखा कि मेरी चूत पूरी की पूरी वीर्य से भर गयी थी और वो ऊपर नीचे होने और लंड के अंदर बाहर होने की वजह से बहुत सारा वीर्य बाहर निकलकर मेरी जांघो पर बह रहा था। दोस्तों मेरी चूत की तो देवरजी ने आज पहली बार पूरी तरह से प्यास को बुझा दिया था और उनके वीर्य के साथ साथ ही मेरी भी चूत ने अपने हथियार डालकर अपना पानी छोड़ दिया, जो अब एक साथ मिलकर मेरी चूत से बहने लगा।

दोस्तों इस तरह से मेरे प्यारे देवरजी ने उस दिन मेरी मस्त मजेदार चुदाई करके मुझे मेरे जीवन का एक स्वर्गीय आनंद दिया था। उस पल को में अपने पूरे जीवन नहीं भुला सकती, वो चुदाई आज भी जब मुझे याद आती है तो मेरा पूरा जिस्म खुशी जोश से भर जाता है। अब तो हम दोनों को जब भी कोई अच्छा मौका मिलता है तो उसी समय हम सेक्स का आनंद लेने लगते है और उनसे मुझे एक बेटा भी हो गया है। में तो अब पूरी तरह से अपने देवरजी की हो गयी हूँ उन्होंने मुझे पूरी औरत बनने का सुख और वो अनुभव दिया जिसको आज मैंने लिखकर आप तक पहुंचा दिया ।।

धन्यवाद …

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