गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 8

सोनी : “ओहो….बात तो antarvasna तू ऐसे कर रही है जैसे kamukta खुद बड़ी दूध की धुली है…और ये काम करना ही नही चाहती…याद है न, पिछले हफ्ते क्या बात हुई थी हमारी, और कल की 10 रूपए वाली शर्त के बाद तो तूने अपनी नंगी गांड भी दिखा दी उस लाला को…अब रह ही क्या गया है, जब 10 रुपय के बदले नंगी गांड दिखा सकती है तो 10 हज़ार के बदले चूत भी तो दे सकती है ना…, इसलिए ये बेकार की बाते मत कर, जो सच है वो यही है की तुझे लाला की ज़रूरत है और लाला को तेरी जवानी की…”

वैसे सोनी सच ही कह रही थी….
रोजाना आपस में सैक्स के बारे में तरह-2 की बातें करने के बाद उन्होने यही सोचा था की अपने हुस्न का जलवा दिखाकर वो लालाजी से समान ऐंठा करेंगी, और ऐसा करने में वो कामयाब भी हो गयी थी…

पिंकी :”चल..मान ली तेरी बात…पर लालाजी ने अगर ये बात गाँव भर में फैला दी तो मेरी माँ तो मेरा गला काट देगी….और तेरा भाई भी तुझे जिंदा नही छोड़ेगा…”

सोनी : “बस…यही तो…यही प्लानिंग तो हमें करनी है…ताकि हमारा काम भी हो जाए और लाला भी अपनी ज़ुबान से कुछ ना बोले…”

दोनो आपस में ऐसे बातें कर रही थी जैसे कोई जंग जीतने निकलना हो ..

वैसे ये प्लानिंग किसी जंग से कम की लग भी नही रही थी…
इतने सालों तक संभाल कर रखी जवानी का पहला सौदा बिना सोचे समझे नही करना चाहती थी वो दोनो…

यहाँ एक बात जान लेनी आवश्यक है की चूत की खुजली के बारे में पिंकी ज़्यादा आगे थी…
उसी का दिमाग़ इस तरह की बातों में ज़्यादा दौड़ता था…
अपने माँ बाप का मूड भाँपकर वो रात भर सिर्फ़ उनकी चुदाई भरी आहें सुनने के लिए जागा करती थी….
अपनी चूत को रगड़ कर वो जब तक दिन में 2-3 बार झड़ नही जाती थी, उसे चैन ही नही आता था…
नहाते हुए भी वो अपने पूरे बदन, ख़ासकर मुम्मो को निचोड़कर रख देती थी…
गाँव के हर मर्द के बारे में सोचकर, उसके लंड को अपनी चूत में लेते हुए सिसकारियां मारते हुए अपनी चूत रगड़ना उसके लिए आम बात थी…
और इसलिए उसने अपनी इन बातों के जाल में सोनी को भी फँसा लिया था…
जब दिन भर उसकी पक्की सहेली सैक्स के बारे में बाते करती तो वो भला कैसे इस रोग से अछूती रह जाती…
जवानी के कीड़े ने उसे भी काट लिया और वो दोनो अक्सर सैक्स से जुड़ी गंदी बाते करके घंटो हँसती रहती…
खेल – २ में वो एक दूसरे के अंगो सहलाती और जल्द ही वो खेल सारी मर्यादाएं लांघकर सैक्स के खेल में बदल गया, जिसमें वो गन्दी वाली मूवीज की तरह लैस्बियन सैक्स भी करने लगी

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और इसी दौरान उन्होने शर्त लगाकर, लालाजी को भी सताया और अपनी भड़क रही जवानी को शांत करने का उन्हे ये एक नया तरीका मिल गया..

पिंकी बोली : “मेरे दिमाग़ में एक आइडिया है…और अगर वो आइडिया कामयाब हो गया तो पिताजी के पैसो की सिरदर्दी भी दूर हो जाएगी और हमारा काम भी बन जाएगा…और इसके लिए आज शाम को ही हम दोनो लाला की दुकान पर चलेंगे..बोल मंजूर है..”

सोनी जानती थी की उसके खुराफाती दिमाग़ में ज़रूर कुछ गंदा पक रहा है…
पर मज़े लेने की चाह तो उसमे भी बहुत थी और वो जानती थी की वो जो भी करेगी, उसमे मज़े तो दोनो को ही मिलेंगे…

इसलिए उसने तुरंत हां कर दी.

पिंकी ने उसे पूरा प्लान समझाया और सारी बात सुनकर सोनी भी उसके दिमाग़ की दाद दिए बिना नही रह सकी..

बस…
फिर क्या था….
दोनो शाम को अपनी प्लानिंग के अनुसार लालाजी की दुकान पर पहुँच गयी.

लालाजी ने जब दूर से उन दोनो हुस्न की परियों को अपनी दुकान पर आते देखा तो उनकी धोती में सुस्ता रहा काला अजगर अंगड़ाई लेता हुआ खड़ा हो गया…
जैसे कह रहा हो ‘आ गयी दोनो हरामजादियां , अब आएगा मज़ा’

लालाजी : “आओ आओ…. क्या हाल है पिंकी….सोनी, बोल क्या लेना है आज तुम्हे …”

बात तो वो पिंकी से कर रहे थे पर उनका एक हाथ उनकी धोती में घुस कर अपने लंड को रगड़ रहा था…

पिंकी ने सोनी की तरफ देखा, उसने एक डरा हुआ सा चेहरा बना रखा था….
जैसे कुछ कहना चाहती हो पर सकुचा रही हो..

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लालाजी : “अररी, साँप सूंघ गया है क्या तुझे….बोल ना…क्या लेगी…”

लालाजी का तो मन कर रहा था की बस एक बार बोल दे ‘लालाजी , आपका लंड लूँगी…बोलो…दोगे क्या..’

पर वो भी जानते थे की वो ऐसा नही बोलेगी…

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