गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 6

और फिर कुछ सोचकर antarvasna सोनी बोली : “यार, kamukta अगर तू बोल रही है की उनका आगे से इतना मोटा था तो सच में उनसे चुदाई करवाने में काफ़ी मज़ा आएगा…” पिंकी उसके चेहरे को देखकर सोचने लगी की उसकी बात का मतलब क्या है..

सोनी : “मैं तुझे बता रही थी ना मीनल दीदी के बारे में .. उन्होने ही मुझे बताया था… उनके पति यानी मेरे जीजाजी का लंड तो सिर्फ़ इतना मोटा है जितना मेरा अंगूठा…और इतना ही लंबा…बस….इसलिए वो ज़्यादा एंजाय भी नही कर पाती…”

पिंकी खुली आँखो से ऐसे लंड को इमेजीन करने लगी जो अंगूठे जितना मोटा और लंबा हो….
और उसके बारे में सोचकर उसे कुछ ज़्यादा एक्साइटमेंट भी नही हुई…
सोचने में ही ऐसा लग रहा है तो अंदर जाकर भला कौन सा तीर मार लेना है ऐसे लंड ने…

इससे अच्छा तो मोटा लंड ही है….
चूत फांके चीरता हुआ जब वो अंदर जाएगा तो कितना मज़ा मिलेगा…
ये सोचकर ही उसकी चूत में एक कसक सी उठी और गीलेपन का एहसास पिंकी को दे गयी…

”उम्म्म्मममममममम…… अब ऐसी बाते करेगी तो मुझे फिर से कुछ होने लगेगा…”

यही वो शब्द थे जिन्हे सुनने के लिए सोनी इतनी मेहनत कर रही थी…

वो उसके करीब आई और अपनी जीभ से उसके होंठो को चाटते हुए बोली : “तो कौन बोल रहा है साली की सब्र कर… दिखा दे अपनी रसीली चूत एक बार फिर….लालाजी का नाम लेकर…”

सोनी अपनी सहेली की रग-2 से वाकिफ़ थी….
और शायद अंदर से ये भी जानती थी की लालाजी से चुदने के सपने वो कई दिनों से देख रही है….
ऐसे मौके पर एक बार फिर से लालाजी का नाम लेकर उसने फिर से उसकी चूत का रस पीने का प्रोग्राम पक्का कर लिया…

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सोनी को भी इस खेल में मज़ा आता था…
और आए भी क्यो नही, भले ही एक लड़की का दूसरी लड़की के साथ ऐसा रिश्ता ग़लत होता है पर जब तक उनकी चूत में किसी का लंड नही जा सकता तब तक अपनी पक्की सहेली की जीभ तो घुस्वा ही सकते है वो दोनो…
और जब से सोनी ने उसकी चूत का रस पिया था, तब से तो वो उसके नशीले रस की दीवानी सी हो चुकी थी…
हालाँकि उसने खुद अपनी चूत का रस भी उंगली डालकर चखा था..
पर उसमे वो नशा नही था जो पिंकी की चूत से निकले रस का था….
जैसे पहली धार की कच्ची शराब हो ….
ठीक वैसा नशा था उसका…

और ये सब बाते करने के पीछे उसका मकसद एक बार फिर से उसकी चूत का रस पीने का था… सोनी ने जैसे ही पिंकी के होंठो को चाटा
उसके तो कुत्ते फैल हो गये…
वो भी उसके होंठो पर टूट पड़ी…
सोनी ने उसकी टॉवल को खींच कर कागज़ की तरह नीचे फेंक दिया…
अंदर से तो वो पूरी नंगी ही थी..

पिंकी को उसके गुलाबी निप्पल वाले नन्हे अमरूद भी बहुत पसंद थे….
गोरे-2 कच्चे टिकोरों पर चमक रहे लाल कंचे देखकर उसका मन ललचा उठा उन्हे चूसने के लिए…

वो उन्हे काफ़ी देर तक चूसती रही

फिर सोनी ने उसे उसी खाट पर लिटा दिया जिसपर अभी कुछ देर पहले लालाजी बैठे थे…

सोनी ने भी अपने कपडे झटके से उतार फेंके, वो पिंकी के मुकाबले थोड़ी सांवली थी, पर उसका बदन भी काफी कसा हुआ था , वैसे भी लड़कियां नंगी होकर हमेशा ख़ूबसूरत दिखती हैं

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और उसकी टांगे अपने कंधे पर लगाकर वो उसकी शहद की दुकान से मिठास बटोरने लगी..

”आआआआहह खा जा इसे…….. निकाल ले सारा जूस अंदर का…..अहह…साली आजकल बहुत बहती है ये…..पी जा सारा रस….पी जा…”

सोनी को तो वो रस वैसे ही बहुत पसंद था….
वो अपनी जीभ की स्ट्रॉ लगाकर उसकी चूत का रस सडप -2 करके पीने लगी…

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