गाँव का हरामी साहूकार – लालाजी 5

एक पल के लिए तो antarvasna पिंकी भी घबरा गयी की kamukta ये क्या था जो उसके पेट से आ टकराया… उसने नज़रें नीचे की तो लालाजी की धोती में से झाँक रहे उनके मोटे लंड पर उसकी नज़र पड़ी, जो बड़ी चालाकी से अपना चेहरा बाहर निकाल कर पिंकी के बदन को टच कर रहा था…

वो तो एकदम से डर गयी…
आज से पहले उसने लंड का सिर्फ़ नाम ही सुना था
कभी देखा नही था…
ये तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई काली घीस हो…उसकी कलाई कितना मोटा था और लगभग उतना ही लम्बा

उसने घबराकर लालाजी को धक्का दिया और दूर जाकर खड़ी हो गयी…
लालाजी ने भी अपने पालतू जानवर को वापिस उसके पिजरे में धकेल दिया और हंसते हुए चारपाई पर वापिस बैठ गये…

उन्हे तो पता भी नही चला की पिंकी ने उनका जंगली चूहा देख लिया है..

लालाजी : “चल, तेरी बात मानकर मैं कुछ दिन और रुक जाता हूँ …इसी बात पर एक चाय तो पीला दे….”

पिंकी बेचारी सहमी हुई सी अंदर गयी और चाय बनाने लगी…
उसके जहन में रह-रहकर लालाजी के लंड की शक्ल उभर रही थी…
उसने तो सोचा था की गोरा-चिट्टा , सुंदर सा लंड होता होगा…
जिसे सहलाने में , दबाने में , चूसने में मज़ा मिलता है
इसलिए लड़किया उसकी दीवानी होती है….
उसे क्या पता था की वो निगोडा ऐसा कालू निकलेगा..

जैसे-तैसे उसने चाय बनाई और लालाजी को देने पहुँच गयी..
लालाजी की नज़रें उसके अंग-2 को भेदने में लगी थी, ये बात तो उसे भी अच्छे से पता थी
पर उसे भी तो उन्हे अपना शरीर दिखाकर सताने में मज़ा आता था…

खैर, चाय पीकर लालाजी चले गये…
और उसने आवाज़ देकर अपनी सहेली सोनी को अपने घर बुला लिया..
और उसे लालाजी के घर आने के बाद से लेकर जाने तक का पूरा किस्सा विस्तार से सुनाया.. जैसे-तैसे उसने चाय बनाई और लालाजी को देने पहुँच गयी..
लालाजी की नज़रें उसके अंग-2 को भेदने में लगी थी, ये बात तो उसे भी अच्छे से पता थी
पर उसे भी तो उन्हे अपना शरीर दिखाकर सताने में मज़ा आता था…

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खैर, चाय पीकर लालाजी चले गये…
और उसने आवाज़ देकर अपनी सहेली सोनी को अपने घर बुला लिया..
और उसे लालाजी के घर आने के बाद से लेकर जाने तक का पूरा किस्सा विस्तार से सुनाया..

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अब आगे
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सोनी : “यार, तू दिन ब दिन बड़ी हरामी होती जा रही है…. पहले तो तू लालजी को सताती थी अपना बदन दिखाकर और आज तुझमे इतनी हिम्मत आ गयी की उनका हथियार भी देख लिया तूने…”

पिंकी : “अररी, मैने जान बूझकर नही देखा री…वो तो बस….शायद…मुझे ऐसी हालत में देखकर उनका वो काबू में नही रहा…इसलिए बाहर निकल आया…”

उसने शर्माते हुए ये कहा

सोनी : “ओये, रहने दे तू …तुझे मैं अच्छे से जानती हूँ ….पिछले कुछ दिनों से तू कुछ ज़्यादा ही उड़ने लगी है….यही हाल रहा ना तो जल्द ही चुद भी जाएगी, देख लेना…”

पिंकी : “मुझे चुदने की इतनी भी जल्दी नही है री….और ऐसे लंड से चुदने में तो बिल्कुल भी नही….एकदम काला नाग था लाला का लंड …सच में सोनी, देखकर ही घिन्न सी आ रही थी…डर भी लग रहा था…”

सोनी : “तो तूने क्या सोचा था, जैसी इंसान की शक्ल होती है, वैसा ही उनका लंड भी होता है….हा हा…. वो तो सबका ही काला होता है पागल… बस ये देखना है की वो कितना लंबा है और कितना मोटा…और चुदाई करने में कितनी देर तक अकड़ कर रहता है….”

पिंकी : “तू तो ऐसे बोल रही है जैसे तूने पी एच डी कर ली है इसमें …”

सोनी : “यार, तुझे तो पता है ना…आजकल मीनल दीदी आई हुई है घर पर….कल रात मैं उनसे इसी बारे में बाते कर रही थी…और हम दोनो आपस में बहुत खुली हुई है, तुझे भी पता है…इसलिए उन्होने ये सब बातें बड़े विस्तार से बताई मुझे…”

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मीनल दरअसल सोनी की बड़ी बहन थी…
जिसकी शादी 2 साल पहले अजमेर में हुई थी….
3-4 महीने में 1 बार वो घर पर आ जाया करती थी..

पिंकी : “हम्म ….. हो सकता है उनकी बात सही हो…पर मुझे नही लगता की मैं कभी ऐसे लंड से चुद पाऊँगी ..”

सोनी : “चुदने की बात तो तू ऐसे कर रही है जैसे तू लालजी के लंड को अंदर लेने को पहले से ही तैयार थी…और अब उसका रंग देखकर मना कर रही है…”

पिंकी : “तू चाहे जो भी समझ….पर मुझे नही लगता की मैं कभी चुदाई के बारे में पहले जैसा सोच पाऊँगी …”

बात तो सही थी….
पिछले कुछ दिनों से वो दोनो अक्सर चुदाई की ही बातें किया करती थी…
और लालाजी से पंगे लेने के भी नये-2 तरीके सोचा करती थी..
और ऐसा नही था की गाँव में और लड़के नही थे
वो लालाजी के साथ ही ऐसा इसलिए किया करती थी की ऐसा करने में बदनामी का डर कम था
क्योंकि लालाजी किसी से ज़्यादा बात नही किया करते थे…और उनसे लोग डरते भी थे.
दूसरे लड़को के साथ ऐसी हरकत करने की देर थी की पूरा गाँव उनके पीछे पड़ जाना था..
पर लालाजी के साथ अपने हिसाब से पंगे लेकर वो भी खुश रहती थी और लालजी को भी उनके हिस्से की खुशी मिल जाती थी.
साथ में फ्री का क्रीमरोल तो था ही.

सोनी ने उसे समझाते हुए कहा : “अच्छा तू मुझे एक बात बता….ये लोग अक्सर छुप कर…अंधेरे में .. और रात में ही सैक्स क्यों करते है…”

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पिंकी ने उसे गोल आँखे करके देखा और बोली : “पता नही…”

सोनी : “वो इसलिए की लंड के रंग और रूप से उन्हे कोई लेना देना नही होता….वो अंदर जाकर कैसा मज़ा देगा सिर्फ़ यही मायने रखता है…बाकी सबकी अपनी-2 सोच है…”

पिंकी ने सोचा की बात तो सोनी सही कह रही है….
उसके माँ बाप भी तो सभी के सोने के बाद नंगे होकर चुदाई करते थे…
और वो भी बत्ती बुझा कर…
एक-दो बार उसने सोने का बहाना करके , अंधेरे कमरे में उनके नंगे शरीर की हरकत ही देखी थी…
पर उसे देखकर वो सिर्फ़ उनके मज़े को ही महसूस कर पाई थी, उन दोनो के अंगो को नही देख पाई थी..

पिंकी : “हम्म्म ..शायद तू सही कह रही है…”

सोनी : “अच्छा , ज़रा डीटेल में बता ना…कैसा था लालाजी का लंड …”

पिंकी की आँखो में गुलाबीपन उतर आया….
वो शरमाते हुए बोली : “यार….मैं तो इतना डर सी गयी थी की उसे ढंग से देख भी नही पाई….बस ये समझ ले की….इतना मोटा था आगे से….”

उसने अपने अंगूठे और साथ वाली उंगली को मिलाकर एक गोला बनाया और सोनी को दिखाया…

सोनी : “सस्स्स्स्स्स्स्सस्स…. हाय …… तू कितनी खुशकिस्मत है….. तूने अपनी लाइफ का पहला लंड देख भी लिया….मैं एक बार फिर तुझसे पीछे रह गयी…”

दोनो खिलखिलाकर हंस पड़ी…

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